” मेरे बच्चे अब अल्लाह के पास हैं और यह सीरिया में होने से बेहतर है “

सीरिया में संदिग्ध रासायनिक हमलों में मारे गए बच्चों के एक पिता की आपबीती दास्ताँ

सीरिया के खान शेखौन कस्बे में गुरुवार को उन लोगों को दफनाया गया जिनकी इससे एक दिन पहले हुए रासायनिक हमले में मौत हो गई थी. इनमें अब्दुल हामिद यूसुफ के दो जुड़वां बच्चे भी शामिल थे. उनकी तस्वीरों ने दुनिया को हिला दिया है.

बुधवार को धमाकों की आवाज सुनकर युसूफ जब उठे तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. उन्होंने बगल में सो रहे नौ महीने के अपने दोनों बच्चों को टटोला. उन्हें लगा कि वे ठीक हैं. पत्नी को घर से बाहर न जाने की हिदायत देकर वे पास के ही मकान में रह रहे परिवार के बाकी सदस्यों का हाल जानने के लिए बाहर भागे. रास्ते में उन्होंने देखा कि लोग गिर रहे हैं और उनके मुंह से झाग निकल रहा है. अपने पुश्तैनी मकान में घुसते ही उन्होंने पाया कि उनके दो भाई भी मर चुके हैं.

यूसुफ पत्नी और बच्चों का हाल जानने के लिए वापस घर की तरफ दौड़े. वहां भी तब तक दृश्य बदल चुका था. सीएनएन से बातचीत में उनका कहना था, ‘वे सभी फर्श पर पड़े थे. सब के मुंह से झाग निकल रहा था…मेरे बच्चे अहमद, आया, मेरी पत्नी…पूरा परिवार खत्म हो गया.’

यूसुफ के परिवार के 25 लोग मारे गए. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस हमले में मरने वालों का कुल आंकड़ा 70 से ऊपर पहुंच गया है. हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है. यूरोपीय संघ के मुताबिक इसकी जिम्मेदारी सीरियाई सरकार की है. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक भी हुई. इसमें पश्चिमी देशों ने सीरिया की सरकार की कड़ी निंदा की. ब्रिटेन और फ्रांस ने इसकी जांच करवाने का प्रस्ताव रखा.

लेकिन रूस ने अपने सहयोगी सीरिया का बचाव किया. रूस का कहना था कि सीरिया में हवाई हमले के दौरान एक स्टोर पर हमला किया गया था जहां विद्रोहियों ने कैमिकल रखे थे. रूस और सीरिया मिलकर विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में हवाई हमले कर रहे हैं. उधर, सीरियाई सरकार भी हर बार की तरह रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से इनकार कर रही है. उसके मुताबिक यह विद्रोहियों की कारस्तानी है. खान शेखौन कस्बा सरकार विरोधी विद्रोहियों के कब्जे में ही है.

इसके पीछे जो भी हो, इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हो रहा है. रोते हुए यूसुफ का कहना था कि उनके आंसू खुशी के हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरे बच्चे अब अल्लाह के पास हैं और यह सीरिया में होने से बेहतर है.’

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