न्यूजीलैंड : हमलावर की राइफल पर था ‘श्वेत वर्चस्ववादी’ चित्रण

वेलिंगटन: न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 49 लोगों की जान लेने वाले हमलावर की राइफल पर ‘श्वेत वर्चस्ववादी’ चित्रण मौजूद था। हमलावर ब्रेंटन टैरेंट ने इन हमलों में दो राइफलों का इस्तेमाल किया था, जिस पर एब्बा अकेरलंड का जिक्र था। 11 वर्षीय एब्बा की अप्रैल 2017 में उस वक्त मौत हो गई थी, जब एक उज्बेक नागरिक रखमत अकिलोव ने स्टॉकहोम में ट्रक से लोगों को रौंद दिया था। एब्बा की मौत की घटना हमलावर के जेहन में थी और इसी से प्रेरणा लेकर उसने ‘पश्चिमी सभ्यता के दुश्मनों’ के खिलाफ युद्ध का संकल्प लिया था।

वर्ष 732 में टूर्स की लड़ाई में मुस्लिम आक्रमणकारियों को पराजित करने के लिए ‘श्वेत वर्चस्ववदियों’ द्वारा प्रशंसित चार्ल्स मारटेल की फोटो भी राइफल पर छपी थी।रपटों के मुताबिक, राइफल पर 14 अंक भी अंकित था। साउदर्न पॉवर्टी ला सेंटर के मुताबिक 14 का मतलब 14 शब्द का संकेत भी हो सकता है, जो अडोल्फ हिटलर के मीन केम्फ से संबंधित श्वेत वर्चस्ववाद का एक नारा हो सकता है। घृणा फैलाने वाले समूहों पर नजर रखने वाली इस संस्था ने कहा कि टैरेंट ने राइफल पर श्वार्ज सोन चिन्ह का भी अंकित कर रखा था, जो अति कप्तर दक्षिणपंथी समूहों का पर्याय बन चुका है।

सर्ब के चार नाम भी राइफल पर अंकित थे, जिन्होंने बालकन्स में ओटोमन्स के 500 साल के शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। फूटेज के मुताबिक, टैरेंट कार चलाकर और गाना सुनते हुए पहले एक मस्जिद में गया। गाने में रैडोवन काराजिक को आदर्श बताया गया था, जिसे बोस्निया के मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार के लिए जेल की सजा हुई थी।टैरेंट ने 74 पेज का ‘मेनिफेस्टो’ ऑनलाइन पोस्ट किया है, जिसमें नव फासिस्ट का जिक्र किया गया है और मुस्लिमों में भय पैदा करने की बात कही गई है। उसने इसमें घोर दक्षिणपंथ का समर्थन किया है और आव्रजन विरोधी दस्तावेज पेश किए हैं।

उसने जिक्र किया है कि नार्वे के नरसंहार कर्ता एंडर्स ब्रेविक से उसका संक्षिप्त संपर्क हुआ है। उसने हमले के लिए आर्शीवाद दिया था। दस्तावेज को ‘व्यापक विस्थापन’ करार देते हुए टैरेंट ने अपने को ‘श्वेत परिवार से श्वेत व्यक्ति’ करार दिया है। जिसने अपने लोगों के भविष्य का ध्यान रखा। उसने कहा कि वह चाहता था कि हमला मस्जिद में हो, ताकि लोगों में संदेश जाए कि दुनिया में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।दस्तावेज में कहा गया है कि हमले की योजना दो साल पहले बन गई थी, लेकिन न्यूजीलैंड पूर्व मं हमले की जगह नहीं था। क्राइस्टचर्च का चुनाव तीन महीने पहले ही किया गया था।

 

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