पाक का बडबोलापन कहा, दक्षिण एशिया में भारत आतंकवाद की ‘मातृभूमि’

संयुक्त राष्ट्र: पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मालेहा लोधी ने 72वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीसी) में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के शनिवार को दिए भाषण पर पलटवार करते हुए दक्षिण एशियाई देशों में भारत आतंकवाद की ‘मातृभूमि’ होने का आरोप लगाया है। यह जानकारी रविवार को मीडिया रिपोर्ट से मिली।डॉन समाचार के अनुसार, मालेहा लोधी ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ लगाए गए आतंकवाद के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। दक्षिण एशियाई देशों में भारत आतंकवाद की ‘मातभूमि’ है।

लोधी ने कश्मीर पर भारतीय रुख को खारिज करते हुए कहा कि भारत सरकार और वहां के हुक्मरान पाकिस्तान से दुश्मनी के भाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना कश्मीर में जुल्म ढा रही है और मासूमों पर पैलेट गन से गोलियां बरसा रही है। मलीहा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को कश्मीर मसले में दखल देना चाहिए और जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश माने जाने वाला भारत सबसे बड़ा ‘पाखंड’ है।

गौरतलब हो कि भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार की रात 72वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि पाकिस्तान की पहचान आतंकी देश के रूप में है। पाकिस्तान जितना पैसा आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिये कर रहा है, आतंकी शिविरों पर खर्च कर रहा है अगर उस पैसे को वह देश के विकास पर खर्च करे तो पाक के साथ-साथ पूरे विश्व में अमन चैन कायम होगा और पाकिस्तान में गरीबी दूर हो जाएगी और विकास हो जायेगा। भारत ने जहां डाक्टर, इंजीनियर व वैज्ञानिक पैदा किया है वहीँ पाकिस्तान ने दहशतगर्द-जेहादी, लश्करे तोयबा व हिजबुल मुजाहिद्दीन पैदा किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा आतंकवाद पर दो टुक फैसला करे। नजरिया एक हो और सभी देश आतंकवाद को अलग-अलग नजरिये से देखना बंद करें, एकजुट होकर आतंकवाद से लड़ाई लड़ी जाये तभी इससे पूरे विश्व को मुक्ति मिल सकेगी|72वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत देश गरीबी से लड़ रहा है और हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है, वह भी आतंकियों के सहारे। पाकिस्तान ने हैवानियत की हदें पार कर दी हैं।

पाकिस्तान के वजीर-ए- आजम के भाषण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में शांति और दोस्ती के पैगाम देने की चर्चा की थी, मगर वह दिखता नहीं है जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो शांति और दोस्ती का पैगाम दिया है वह पूरा विश्व देख रहा है। पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम कश्मीर से जुड़े पुराने प्रस्तावों की चर्चा करते हुए कहा कि शिमला समझौता व कश्मीर समझौता में यह स्पष्ट है कि दोनों देश मिलकर की बातचीत से सुलझाएंगे।

इसी परिपेक्ष्य में अपने इस्लामाबाद दौरे की भी चर्चा की जिसमें कॉम्प्रिहेंसिव बाईलेटरल डायलॉग की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भी दोनों देशों को ही मिलकर समस्या का हल करने की बात हुई थी, मगर दुर्भाग्य है की बातचीत का सिलसिला रुकने का कारण भी पाकिस्तान ही है।

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