कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन ने किया सरेंडर, 15 लाख का चेक सौंपा

रांची: झारखंड पुलिस के लिए लंबे समय से सिर दर्द बना पंद्रह लाख का इनामी कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन ने एडीजी आरके मल्लिक के समक्ष सरेंडर कर दिया है। डीआईजी अमोल वेणुकांत होमकर के आवास में कुंदन पाहन ने खुद को सरेंडर किया है। कुंदन ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ऑपरेशन नयी दिशा के तहत सरेंडर किया है। वह झारखंड रिजनल कमेटी के सचिव के रूप में काम कर रहा था। एसएसपी कुलदीप द्विवेदी की कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन को सरेंडर कराने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस मौके पर डीआईजी अमोल वेणुकांत होमकर ने कहा कि नक्सली हिंसा के रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़े, नहीं तो पुलिस की गोली खाने के लिए तैयार रहंे। झारखंड पुलिस के आत्मसमर्पण नीति नई दिशा के तहत भटके हुए नक्सली खुद को सरेंडर करें। आत्मसमर्पण समारोह में एडीजी आरके मल्लिक, सीआरपीएफ के आइजी संजय लाटेकर, एसएसपी कुलदीप द्विवेदी, ग्रामीण एसपी राजकुमार लकड़ा समेत कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे।

सरेंडर के बाद मिला कुंदन को 15 लाख का चेक
भाकपा माओवादी संगठन के झारखंड रिजनल कमिटि के सचिव कुंदन पाहन को सरेंडर करने के बाद 15 लाख का चेक दिया गया। एडीजी आरके मल्लिक ने कुंदन पाहन को सरेंडर पॉलिसी के तहत यह चेक दिया है। सरेंडर के दौरान कुंदन ने संगठन में भटके युवाओं से अपील किया है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत खुद को सरेंडर कर दें। विकास कार्य में सरकार का साथ दें। जंगल में हथियार लेकर रहने से कोई फायदा नहीं है। सरेंडर करने के बाद बची हुई जिंदगी परिवार के सदस्यों के साथ हंसी खुशी से बितायें।

कुंदन ने बीमार होने की बात से किया इंकार
कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन ने बीमार होने की बात से इंकार किया है। वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। बचपन से लेकर अब तक कुंदन को कोई बीमारी नहीं हुई है। उक्त बातें कुंदन पाहन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बतायी। उसने कहा है कि संगठन से निकालने की बात झूठ है। संगठन की गलत नीति को देखते हुए उसने खुद संगठन छोड़ा है। आज की तारीख में संगठन अपनी नीति से भटक गयी है। संगठन के लोग भी काफी कमजोर हो चुके हैं। सेंट्रल कमेटी के सदस्य सिर्फ लेवी लेकर अपने बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। अपने बच्चों को विदेशों में भेजकर पढ़ा रहे है, जबकि दस्ते के सदस्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।

रांची पुलिस के लिए चुनौती था कुंदन पाहन
नक्सली कुंदन पाहन रांची पुलिस के लिए डेढ़ दशक से चुनौती बना था। वह जब से संगठन से जुड़ा था, उसके बाद से खूंटी और रांची में भाकपा माओवादी को मजबूती मिली थी। कुंदन ने अपने बलबूते पर कैडरों की एक बड़ी फौज खड़ी कर दी थी। इसमें अधिकतर आदिवासी युवक शामिल थे। सभी युवक उसके कहने पर कुछ भी करने को तैयार रहते थे। अड़की बाजार में एक बार गश्ती कर रहे पुलिस पर हमला कर दिया था। पुलिस के सारे हथियार लूट लिए थे। खूंटी के रनिया क्षेत्र में भी विस्फोट कर पुलिसर्किमयों को उड़ा दिया था और उनके हथियार लूट लिए थे।

इन-इन प्रमुख घटनाओं में कुंदन रहा है शामिल
वर्ष 2003 में सारंडा में 22 नंबर प्लाटून द्वारा एम्बुश कर पुलिस पर हमला किया गया था। इसमें एक .303 रायफल, दो एसएलआर, एक एलएमजी लूट लिया था। वर्ष 2003 में बलिबा में पुलिस के साथ एम्बुश एवं मुठभेड़ की घटना में शामिल था। इस घटना में काफी संख्या में पुलिस बल को नुकसान और हथियार लूट लिया था।

वर्ष 2008 में तमाड़ के सलगाडीह मोड़ के निकट सुप्रीया ढ़ाबा के पास जमशेदपुर से आ रही आईसीआईसीआई कैश वैन से पांच करोड़ रुपये, सोना, गार्ड का बंदूक और गोली लूट लिया था। इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार को हेम्ब्रम बाजार से जन मिलिशिया के सहयोग से अपहरण कर हत्या कर दिया गया था। इस घटना पुलिस बल में भय पैदा करने के उद्देशय से की गयी थी।

वर्ष 2008 में पुण्डीदिरी पुल के पास बारुदी सुरंग लगा कर विस्फोट कर बुंडू डीएसपी स्व. प्रमोद कुमार की हत्या की गयी थी। रनिया में पुलिस गश्ती पर हमला की घटना में बारुदी सुरंग लगाकर विस्फोट किया था। इस घटना में कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। इस हमले में तीन एसएलआर एवं एक कार्रबाइन लूट लिया गया था।

वर्ष 2010 में हुआंगहातू के बगल में पुलिस के साथ मुठभेड़ में शामिल रहा है। इस घटना में कुंदन के अलावा 20 लोग शामिल थे। वर्ष 2012 में चटनीबेड़ा में जेआरसी की मीटिंग चल रही थी। अचानक पुलिस के पहुंचने से मुठभेड़ हुआ था। इस घटना में अजय महतो के बॉडीगार्ड सुरजन मारा गया था। वर्ष 2013 में शंकरा, टेबों थाना में जेआरसी की मीटिंग चल रही थी। इस घटना में पुलिस के साथ मुठभेड़ में प्रदीप स्वांसी को स्पीलिंटर लगा था। अजय महतो के बॉडीगार्ड मंटू को हाथ में गोली लगी थी।

वर्ष 2008 में बुंडू विधायक स्व: रमेश सिंह मुंडा की हत्या अमिताभ बागची एवं अनल दा के निर्देश पर एक्शन टीम द्वारा बुंडू स्कूल में प्रोग्राम के दौरान गोली मारकर कर दी गयी थी। हत्या करने में बोलो उर्फ बलराम साहू, विशाल उर्फ तुलसी, सचिन, संतोष, अर्जुन शामिल थे। वर्ष 2011 में माओवादी बंदी के दौरान रड़गांव में टेलर जलाने की घटना।वर्ष 2011 में मारंगबुरु में पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में उग्रवादी जकरिया तथा निर्मल महतो के मारे गये थे। वर्ष 2013 में नकुल सिंह मुंडा की हत्या रंगदारी मांगने को लेकर हुई थी।

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