डेरा मुख्यालय में कर्फ्यू के बीच दूसरे दिन भी तलाशी जारी

सिरसा/चंडीगढ़: हरियाणा में सिरसा के पास डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी तलाशी जारी रही।तलाशी अभियान में हजारों की संख्या में सुरक्षामकर्मी और स्थानीय प्रशासन लगा हुआ है।डेरा परिसरों के आसपास कर्फ्यू लगा हुआ है।डेरा परिसरों को खाली कराने के लिए शुक्रवार से ही अभियान शुरू हो गया था। इस दौरान कुछ कंप्यूटर, लग्जरी एसयूवी और कुछ मुद्राएं भी जब्त की।

सूत्रों के मुताबिक, तलाशी टीमों को कई जूते भी मिले हैं। डिजाइनर कपड़े, रंग-बिरंगी टोपियां मिली।
डेरा प्रमुख को उनकी दो पूर्व शिष्याओं के दुष्कर्म के आरोप में 20 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
तलाशी अभियान शुक्रवा सुबह कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था और कर्फ्यू के बीच शुरू हुआ। मीडिया को डेरा परिसरों से कुछ ही दूरी पर रोक दिया गया।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस तलाशी अभियान के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए.के.एस पवार को पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए अदालत आयुक्त नियुक्त किया गया है और अब उन्हीं की निगरानी में तलाशी ली जा रही है। तलाशी की वीडियोग्राफी भी की जा रही है।अर्धसैनिक बलों और हरियाणा पुलिस के साथ वरिष्ठ पुलिस प्रशासन और पुलिस अधिकारी भी इस तलाशी अभियान में शामिल हैं।
बम निरोधक दस्ते, कमांडोज, स्निफर डॉग की भी तैनाती की गई है।

सिरसा और आसपास के क्षेत्रों से डेरा मुख्यालय जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया है।
जिला अधिकारियों का कहना है कि तलाशी अभियान से डेरा प्रमुख के कई रहस्यों से पर्दा उठ सकता है लेकिन डेरा प्रमुख की गतिविधियों का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि तलाशी अभियान में देरी कर दी गई है। ऐसा हो सकता है कि डेरा प्रबंधन ने राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के कुछ दिनों के बाद से डेरा परिसर से हथियारओं और अन्य अवैध चीजों को हटा दिया हो।

डेरा मुख्यालय दो परिसरों में बंटा है। इनमें से एक परिसर 600 एकड़ में जबकि दूसरा 100 एकड़ में फैला है।
डेरा परिसरों में एक स्टेडियम, अस्पताल, शैक्षणिक संस्तान लग्जरी रिजॉर्ट, बंगले और बाजार भी हैं।
डेरा प्रमुख के हजारों अनुयायी स्थाई तौर पर यहां रहते हैं और काम करते हैं।जिस परिसर में डेरा प्रमुख रहते थे, उसे ‘गुफा’ कहा जाता है। यह लगभग 100 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें अल्ट्रा लग्जरी सुविधाएं हैं।
तलाशी अभियान शुरू होने से कुछ घंटों पहले डेरा के मुखपत्र ‘सच कहूं’ में स्वीकार किया गया कि डेरा परिसरों में मानव अवशेष दबे हुए हैं।

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