सर्वोच्च अदालत ने राफेल सौदे की जांच संबंधी याचिकाएं खारिज कीं

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राफेल विमान सौदे की अदालत की निगरानी में जांच संबंधी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस सौदे की प्रक्रिया में कुछ भी संदेहजनक नहीं है।वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा का उल्लेख करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस संजय कृष्णन कौल और जस्टिस के.एम.जोसेफ की पीठ ने कहा, ”हम संतुष्ट हैं, इस सौदे में संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है।” अदालत ने कहा कि विमानों की कीमत और राफेल विनिर्माण कंपनी दसॉ द्वारा ऑफसेट साझेदार चुनने की उनकी पसंद पर सवाल करना अदालत का काम नहीं है और पीठ को इस मामले में कुछ भी संदेहजनक नहीं लगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रक्षा सौदे मामले में हस्तक्षेप का उन्हें कई कारण नजर नहीं आता। अदालत में दायर इन चारों याचिकाओं में 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी।गोगई ने कहा कि किसी भी शख्स के नजरिए को इस समझौते में हस्तक्षेप का आधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने फैसले में कहा कि यह समझौता 23 सितंबर 2016 को हुआ था लेकिन तब तक इस समझौते पर सवाल नहीं उठाए गए, जब तक फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने एक साक्षात्कार में यह नहीं कहा कि इस सौदे में ऑफसेट पार्टनर चुनने के लिए भारत सरकार की ओर से कथित दबाव बनाया गया था।

अदालत ने कहा कि इन विमानों की जरूरत और इनकी गुणवत्ता संदेहों के घेरे में नहीं है।अदालत ने कहा कि हम विमानों की खरीद की प्रक्रिया के हर पहलू पर गौर नहीं कर सकते। अदालत ने ऑफसेट पार्टनर चुनने की पसंद के बारे में कहा कि भारत सरकार की भूमिका पर विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह पूरी तरह से दसॉ की पसंद थी।सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से किसी को लाभ पहुंचाने के साक्ष्य नहीं मिले हैं।केंद्र सरकार ने इस सौदे का बचाव करते हुए कहा है कि फ्रांस की तरफ से कोई संप्रभु गारंटी नहीं है लेकिन लिखित आश्वासन मिला है।प्रशांत भूषण, अरुण शौरी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, वकील एम.एल.शर्मा, विनीत दांडा और संजय सिंह द्वारा दायर याचिकाओं में अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी।

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