राहुल गांधी ने ली लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी, दिया इस्तीफा

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को घोषणा की कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और उन्हें लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि पार्टी 542 में से केवल 52 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई।संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी ने ट्विटर पर एक खुले पत्र में सार्वजनिक रूप से कहा कि भाजपा की व्यापक जीत ने यह साबित कर दिया है कि देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा करने का आरएसएस का लक्ष्य अब पूरा हो गया है।

राहुल ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए कहा, ”’कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर मैं 2019 के चुनाव के नुकसान के लिए जिम्मेदार हूं। हमारी पार्टी के भविष्य के विकास के लिए जवाबदेही महत्वपूर्ण है। ” राहुल ने कहा ”यही कारण है कि मैं कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं।” संसद में पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने कहा, ”मैंने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है और मैं अब पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं।” राहुल द्वारा लिखे पत्र में कहा गया, ”पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए कठोर निर्णयों की आवश्यकता होती है और 2019 की विफलता के लिए कई लोगों को जवाबदेह बनाना होगा।

राहुल ने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को अनदेखा कर दूसरों को जवाबदेह ठहराना अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि किसी नए व्यक्ति के लिए कांग्रेस का नेतृत्व करना महत्वपूर्ण था और उनके लिए उस व्यक्ति का चुनाव करना सही नहीं होगा। इससे पहले दिन में राहुल ने संवाददाताओं से कहा था, ”मैंने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है और अब मैं पार्टी प्रमुख नहीं हूं।” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस कार्यसमिति को जल्द से जल्द एक बैठक बुलानी चाहिए और नए पार्टी अध्यक्ष पर फैसला करना चाहिए।” गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद राहुल ने 25 मई को घोषणा की कि वह कांग्रेस प्रमुख पद से इस्तीफा दे देंगे। राहुल खुद उत्तर प्रदेश के अमेठी से चुनाव हार गए थे मगर केरल के वायनाड से उन्होंने जीत दर्ज की।

अपने चार पन्नों के पत्र में राहुल ने कहा, ”आरएसएस भाजपा के वैचारिक माता-पिता, देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा करने में सफल रहे। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने की मांग की।” राहुल ने कहा, ”हमने चुनाव किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं लड़ा बल्कि हमने भारतीय राज्य की पूरी मशीनरी से लड़ाई लड़ी, जिसका हर संस्थान विपक्ष के खिलाफ था। इससे अब साबित हो गया है कि हमारी संस्थागत तटस्थता अब भारत में मौजूद नहीं है।” राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सांस नहीं रोकती है। उन्होंने कहा कि कोई भी राशि या प्रचार कभी भी सच्चाई की रोशनी को नहीं छिपा सकता है। राहुल ने कहा कि वह कांग्रेस के एक वफादार सैनिक व भारत के एक समर्पित पुत्र बने रहेंगे।

 

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