राफेल, राम मंदिर पर हंगामे के बीच लोकसभा दिनभर के लिए स्थगित

नई दिल्ली: प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा को गुरुवार को दो बार संक्षिप्त रूप से स्थगित किए जाने के बाद फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष ने राफेल सौदे की जांच कराने की मांग करते हुए हंगामा किया, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की घटक शिव सेना ने अयोध्या में जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण कराने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की। सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित किए जाने के बाद कार्यवाही फिर जैसे ही शुरू हुई कांग्रेस, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और शिव सेना के सदस्य अपनी-अपनी मांगों के समर्थन में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के आसन के समीप पहुंचकर हंगामा व नारेबाजी करने लगे।

कांग्रेस के सदस्य राफेल पर चर्चा कराने की मांग कर रहे थे, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल वितरण का मुद्दा उठाया और तेदेपा के सदस्यों ने आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने शिवसेना के सदस्यों को शून्य काल के दौरान अपना मुद्दा उठाने की अनुमति दी।शिवसेना के आनंद राव अडसुल ने मांग की कि सरकार को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अगले आम चुनाव से पहले अध्यादेश लाना चाहिए। आनंद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 2014 के चुनाव घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण कराने के किए गए वादे की भी याद दिलाई।

उन्होंने कहा कि सरकार को अगले आम चुनावों से पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक अध्यादेश लाना चाहिए।अडसुल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राम मंदिर के निर्माण के लिए पहल नहीं कर सके क्योंकि वह 25 राजनीतिक दलों की गठबंधन सरकार चला रहे थे।उन्होंने कहा, ”लेकिन, यहां एक ऐसी सरकार है जिसके पास पूर्ण बहुमत है। इन्होंने अपने घोषणापत्र में इसका उल्लेख भी किया हुआ है।” अडसुल ने कहा, ”इस सरकार के साढ़े चार साल पहले ही पूरे हो चुके हैं लेकिन कुछ भी नहीं हुआ है। भाजपा के साथ हमारा गठबंधन हिंदुत्व पर आधारित है लेकिन ऐसा लगता है कि भाजपा इसे भूल गई है।” अडसुल ने यह भी कहा कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम एक संकेत हैं और सरकार को इसे समझना चाहिए।

तेदेपा के सांसद वेंकटेश्वर राव ने अध्यक्ष के आसन के समीप लगे माइक पर पोस्टर लगाने की कोशिश की जिस पर सुमित्रा महाजन ने उन्हें झिड़का और कहा कि अगर वह ऐसा करते हैं तो वह उनका नाम लेने के लिए मजबूर हो जाएंगी और ऐसा करते ही उन्हें सदन छोड़कर जाना होगा। अडसुल ने जैसे ही अपनी बात खत्म की महाजन ने सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। शिवसेना के सदस्यों ने अपनी मांग के समर्थन में संसद परिसर में भी विरोध किया।इससे पहले, भाजपा के सांसद बी.वाई. राघवेंद्र ने सदन के नए सदस्य के रूप में शपथ ली। उन्होंने उपचुनाव में शिमोगा से जीत दर्ज की थी।

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