छत्तीसगढ़ में कांग्रेस, तेलंगाना में टीआरएस आगे, मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में मंगलवार को कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापस आने के लिए तैयार है। राजस्थान में भी कांग्रेस सत्तारूढ़ भाजपा से आगे है जबकि मध्य प्रदेश में दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर है।
लेकिन तेलंगाना और मिजोरम में कांग्रेस पिछड़ गई है।चुनाव बाद एग्जिट पोल के नतीजे छत्तीसगढ़ में सही होते दिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़-बसपा के गठबंधन के बिना कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है।कांग्रेस के उम्मीदवार छत्तीसगढ़ की 90 में से 60 सीटों पर आगे हैं जबकि भाजपा 23 सीटों पर आगे है। बसपा-जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ गठबंधन को पांच सीटें मिली हैं।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, कांग्रेस 199 में से 101 सीटों पर आगे है जबकि भाजपा 71 सीटों पर आगे है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उनकी पार्टी निर्दलियों की मदद से सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त है।जयपुर में कांग्रेस कार्यालय, गहलोत और राज्य की कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट के आवास के बाहर जश्न का माहौल है।इसके विपरीत मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है और वहीं जयपुर में भाजपा के कार्यालय में सन्नाटा पसरा है।

मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। राज्य में भाजपा पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। मतगणना केंद्रों से आ रहे रुझानों में राज्य में कांग्रेस आगे है जबकि भाजपा पीछे चल रही है।यहां कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार 230 में से 110-110 निर्वाचन सीटों पर आगे चल रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह आश्वस्त हैं कि भाजपा राज्य में सत्ता में रहेगी।तेलंगाना में कांग्रेस पिछड़ रही है। सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

टीआरएस कार्यकर्ता ड्रम की धुनों पर सड़कों पर नाच रहे हैं, आतिशबाजी हो रही है और मिठाइयां बांटी जा रही हैं। टीआरएस 119 सीटों में से 85 पर आगे है। कांग्रेस गठबंधन 23 सीटों पर आगे है।मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी कविता ने मीडिया को बताया, ”बीते साढ़े चार सालों में हमारी मेहनत रंग लाई है। केसीआर से बेहतर तेलंगाना को कई नहीं जानता।” मिजोरम में एमएनएफ 40 में से 26 सीटें जीतती दिख रही है, जबकि कांग्रेस केवल छह सीटों पर आगे है। यह एकमात्र पूर्वोत्तर राज्य था, जहां कांग्रेस सत्ता में थी।
मुख्यमंत्री लाल थनहालवा दोनों सीटों से हार गए हैं।

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