उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के खिलाफ मामलों को देखने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिजनों के खिलाफ दायर 20 से अधिक मामलों पर रिपोर्ट मांगने से मंगलवार को इनकार कर दिया। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता दिल्ली के एम्स में मौत से जंग लड़ रही है। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह पीठ मामले का दायरा नहीं बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा, ”दुष्कर्म पीड़िता व उसके परिवार के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में पीठ हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।” पीठ ने यह बात उस वक्त कही जब एक वकील ने दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिजनों के खिलाफ लंबित पड़े मामलों काजिक्र किया।

अदालत ने कहा कि वह पीड़िता से जुड़े पहले के उन पांच मामलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है, जिनकी सुनवाई की गई थी। मामले में आगे की सुनवाई अगले सोमवार तक के लिए टाल दी गई है। शीर्ष न्यायालय ने पीड़िता के परिजन के एक पत्र पर संज्ञान लिया था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के गुर्गों से परिवार को धमकियां मिलने की बात कही गई थी। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल पीड़िता का इलाज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चल रहा है। उसे पिछले हफ्ते ही लखनऊ से यहां स्थानांतरित किया गया था। पीड़िता की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे एडवांस सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है।

उसके वकील महेंद्र सिंह की हालत भी बेहद गंभीर बनी हुई है। वह बेहोश हैं और उन्हें भी एडवांस सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। रायबरेली में 28 जुलाई को दुष्कर्म पीड़िता अपनी चाची, मौसी और अपने वकील के साथ कार में यात्रा कर रही थी। उसी दौरान एक तेज रफ्तार ट्रक ने उस कार में जोरदार टक्कर मार दी। ट्रक का नंबर ग्रीस से मिटाया गया था, इसलिए यह हादसा संदेहास्पद बना हुआ है। पीड़िता की मौसी मामले की गवाह थी। आशंका व्यक्त की जा रही है कि गवाह और वकील सहित पीड़िता को खत्म करने की साजिश के तहत कार में टक्कर मारी गई होगी।

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