मस्तिष्क को कंप्यूटर से जोड़ने की तैयारी

मस्तिष्क को कंप्यूटर से जोड़ने की बातें जो पहले सायेंस फिक्शन में हुआ करती थीं वे अब धीरे-धीरे हकीकत में बदल रही हैं। प्रयोगशाला में कंप्यूटर और मस्तिष्क के बीच संवाद हो रहा है और इस संवाद की क्वॉलिटी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। एक दिन हम अपने मन के विचारों से अंतरिक्षयान को संचालित कर सकेंगे। क्या पता जल्दी ही हम अपने मस्तिष्क को कंप्यूटर में अपलोड करने में सफल हो जाएं और इस प्रकिया में एक दिन साइबर्ग (इलेक्ट्रॉनिक अंगों से युक्त सुपरमैन) का निर्माण कर दें।

मस्तिष्क और कंप्यूटर के बीच सीधा रिश्ता कायम करने की दौड़ में मशहूर अरबपति इलोन मस्क भी शामिल हो गए हैं। इस कार्य के लिए उन्होंने न्यूरोलिंक नामक कंपनी अधिग्रहीत की है। मस्क टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि अत्यंत महंगी स्पेस टेक्नॉलजी निजी उद्यम से भी चलाई जा सकती है। सत्तर के दशक में बेल्जियम के वैज्ञानिक जैक्स वाइडल के एक आइडिया से न्यूरो टेक्नॉलजी का जन्म हुआ था।

वाइडल ने कहा था कि इलेक्ट्रोएन्सिफेलोग्राफी (ईईजी) के प्रयोग से ऐसे सिस्टम बनाए जा सकते हैं जिनके जरिए मस्तिष्क से बाहरी उपकरणों को नियंत्रित किया जा सकेगा। ईईजी से खोपड़ी में लगे इलेक्ट्रोड के जरिए मस्तिष्क की तरंगों को रिकॉर्ड किया जाता है। वाइडल का आइडिया यह था कि रिकॉर्ड किए गए ईईजी सिग्नलों को कंप्यूटर के एल्गोरिथम के जरिए कमांड में बदल दिया जाए। तभी से वाइडल का आइडिया जोर पकड़ने लगा। शरीर से अक्षम लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस का प्रयोग कर रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान अमेरिका और यूरोपीय यूनियन में ब्रेन रिसर्च पर जोर काफी बढ़ा है। रिसर्च लैब्स में मुख्य फोकस मस्तिष्क की कार्य प्रणाली को समझने पर होता है। उनके द्वारा प्रस्तावित नई ऐप्लिकेशंस व्यावसायिक उत्पादों में नहीं बदल पा रही हैं। फिर भी अनेक बड़ी कंपनियों ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर रिसर्च तेज करने के लिए निवेश बढ़ाने की घोषणा की है। अब मस्क की कंपनी अपनी ‘न्यूरल लेस’ टेक्नॉलजी से ब्रेन-कंप्यूटर रिसर्च को आगे बढ़ाएगी।

इस टेक्नॉलजी में मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड फिट करके सिग्नल प्राप्त किए जाएंगे। कंपनी का दावा है कि इन सिग्नलों की क्वॉलिटी ईईजी से बेहतर होगी। लेकिन मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड लगाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ेगी। मस्क ने इस प्रॉजेक्ट के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया है। पिछले वर्ष उन्होंने कहा था कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर मनुष्य की श्रेष्ठता स्थापित करने के लिए ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस बहुत आवश्यक है। मस्क का कहना है कि न्यूरोलिंक चार वर्ष के अंदर अपना पहला उत्पाद बाजार में उतार देगी।

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