सोशल साइट की लत बना सकती है गठिया का मरीज

लखनऊ: आधुनिक जीवनशैली में इंटरनेट का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। इसके कई फायदे हैं, तो कई नुकसान भी। वो कहते हैं न अति हर चीज की बुरी होती है। बस वही बात इंटरनेट पर भी लागू होती है। अगर आप बहुत ज्यादा सोशल साइट पर एक्टिव हैं, वह भी मोबाइल के जरिए तो जरा अपनी आदत में सुधार लाइए। या तो इसे कम कर दीजिए या फिर संबंधित एक्सरसाइज करिए। अस्थि रोग विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक और व्हाट्सएप जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट में सर्फिंग की लत गठिया का मरीज बना सकती है। मोबाइल फोन का अधिक उपयोग से कलाई और उंगलियों की जोड़ों में दर्द, आर्थराइटिस तथा रिपीटिटिव स्ट्रेस इंज्युरिज (आरएसआई) की समस्या पैदा कर रहा है।

आरएसआई एक ही गतिविधि के लंबे समय तक बार-बार दोहराए जाने से जोड़ों के लिगामेंट और टेंडन में सूजन (इंफ्लामेंशन) होने के कारण होती है।केजीएमयू के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन श्रीवास्तव का कहना है कि ‘बीते कुछ सालों में टच स्क्रीन वाले मोबाइल फोन और टैबलेट के इस्तेमाल का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। इन गैजेट्स के लगातार इस्तेमाल के कारण ऐसे मरीजों की तादाद में भी इजाफा हुआ है जिन्हें उंगलियों, अंगूठे और हाथों में दर्द की समस्या उत्पन्न हो रही है।’

लोहिया अस्पताल के डॉ. सचिव अवस्थी के मुताबिक, ‘जो लोग टच स्क्रीन स्मार्ट फोन और टैबलेट पर बहुत ज्यादा गेम खेलते हैं और टाइप करते हैं उनकी कलाई और अंगुलियों के जोड़ों में दर्द हो सकता है और कभी-कभी अंगुलियों में गंभीर आर्थराइटिस हो सकती है। गेम खेलने वाले डिवाइस के लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण युवा बच्चों में इस समस्या के होने की अधिक आशंका होती है।’ लखनऊ के जाने माने अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आन्नद सिंह के अनुसार,  ‘मोबाइल फोन या अन्य गैजेट्स पर किसी भी गतिविधि के बार-बार दोहराए जाने के कारण जोड़, मांसपेशियां, टेंडन और नर्व्स प्रभावित होते हैं। जिसके कारण रिपीटिटिव स्ट्रेस इंजरीज होती है। जो लोग सेल फोन पर अक्सर संदेश टाइप करने के लिए अपने अंगूठे का उपयोग करते हैं, उनमें कभी-कभी रेडियल स्टिलॉयड टेनोसिनोवाइटिस  विकसित हो जाता है।

इसमें टेंडन प्रभावित होती है और अंगूठे को हिलाने-डुलाने में दर्द होता है। हालांकि डेस्कटॉप कीबोर्ड के लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण दर्द से पीड़ित रोगियों में इसके संबंध की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि डेस्कटॉप कीबोर्ड पर बार-बार टाइप करने पर यह दर्द और बढ़ सकता है।’डॉ. अभिषेक कुमार का कहना है कि ज्यादातर लोग टच स्क्रीन का इस्तेमाल गलत तरीके से और गलत पोस्चर में करते हैं। स्ट्रेस से संबंधित इंजुरीज लोगों को तब भी हो सकती है जब वे टाइप करते समय अपनी कलाई पर अधिक दबाव डालते हैं या अपने हाथों को बहुत ज्यादा आगे या पीछे की ओर झुकाते हैं, जिससे उनके हाथों पर स्ट्रेस पड़ता है। इसके कारण होने वाली बीमारियों में कार्पेल टनेल सिंड्रोम सबसे सामान्य है।

यह कलाई में मीडियन नर्व पर दबाव पड़ने के कारण होता है। उन्होंने बताया कि आपकी गर्दन और इसे सहारा देने वाली सर्वाइकल स्पाइन पर खराब पोस्चर का बहुत प्रभाव पड़ता है। अपनी गर्दन को बहुत ज्यादा आगे या पीछे की ओर नहीं मोड़ें और विशेषकर अपने सिर को एक तरफ या दूसरे तरफ लंबे समय तक मोड़ कर नहीं रखें। अपनी गर्दन को एक ही स्थिति में लंबे समय तक नहीं रखें और थोड़ी-थोड़ी देर पर इसे आराम दें। यदि आप गर्दन को किसी भी स्थिति में रखने पर दर्द, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस करते हैं तो उस स्थिति में तुरंत परिवर्तन लाएं और ऐसी स्थिति में रहें जिसमें आप अधिक आराम महसूस करते हों।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल करने वाले समय-समय पर एक्सरसाइज करते रहें। अपनी कलाइयों को घुमाना, कुछ देर मोबाइल से दूर रहना। चलते-फिरते रहना उन चंद उपायों में शामिल है, जिसके जरिये मोबाइल के नुकसान से बचा जा सकता है।

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