चिकन खाने से सुपरबग के संक्रमण का खतरा

भारतीय-अमेरिकी अध्ययन के शोध में आया सामने

वाशिंगटन: अगर किसी व्यक्ति का संक्रमण ठीक नहीं हो रहा है तो चिकन इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। इस जोखिम की जद में भारत समेत पूरी दुनिया के लोग हैं। शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में यह दावा किया है। इस भारतीय-अमेरिकी अध्ययन के अनुसार, अपने बड़े मुर्गी पालन फार्मो के लिए मशहूर पंजाब में संभवत: सुपरबग या बैक्टीरिया पैदा हो रहे हैं। उन पर सामान्य एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं हो पाते।

स्पष्टत: इस अध्ययन में पंजाब के मुर्गीपालन फार्मो में एंटी बायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया की भारी मौजूदगी का संकेत दिया गया है। इसके साथ ही मुर्गी का उत्पादन बढ़ाने में सहायक माने जाने वाले एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के कारण मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले भयावह प्रभाव की चेतावनी दी गई है। शोधकर्ताओं ने कहा,अगली बार जब आप किसी संक्रमण की चपेट में आएंगे तब सामान्य एंटीबायोटिक के जरिए उसे ठीक करना कठिन हो जाएगा। यह सुपरबग का पनपना है।

इसके लिए खासतौर पर पंजाब के मुर्गीपालन फार्मो को जिम्मेदार मानने की सोच सकते हैं। यह अध्ययन वाशिंगटन डीसी के द सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी ने कराया है। सीडीडीईपी के निदेशक रमन लक्ष्मीनारायण ने कहा, पशु फार्मो में एंटीबायोटिक का अधिक इस्तेमाल हम सबको खतरे में डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब के मुर्गीपालन फार्मो में मुर्गो को मोटा बनाने के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल धड़ल्ले से होता है। इससे उनमें मौजूद बैक्टीरिया के एंटीबायोटिक प्रतिरोधी होने का खतरा बढ़ रहा है।

अध्ययन में पंजाब के मुर्गी फार्मो में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया उच्च स्तर पर पाए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जीवाणुओं, परजीवियों, विषाणुओं और फंगस में एंटीबायोटिक प्रतिरोध पैदा होने से इनके संक्रमण का प्रभावी उपचार कर पाना कठिन होता जा रहा है।इससे मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो रहा है। अगर प्रभावी एंटीबायोटिक नहीं होंगे तो बड़ी सर्जरी और कैंसर कीमोथैरेपी में मुश्किल आएगी। जो संक्रमण एंटीबायोटिक प्रतिरोधी नहीं हैं,उनका उपचार उन संक्रमणों की तुलना में सस्ता होता है,जो एंटीबायोटिक प्रतिरोधी हैं।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.