इमाम के रूप में काम कर रहा था मुजफ्फरनगर से पकड़ा गया आतंकी

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से पकड़ा गया ‘अन्सारल्ला बांग्ला टीम’ का संदिग्ध आतंकी अब्दुल्ला अल मामून पहले एक मस्जिद में इमाम के रूप में काम करता था।

देवबंद के अमहटा गांव के निवासियों ने अब्दुल्ला के पुराने दिनों की याद करते हुए बताया कि वह शादी के लिए बहुत बेकरार रहा करता था। वह गांव वालों से अपने लिए कोई अच्छी सी लड़की ढूंढने के लिए कहता रहता था। उसके बोलने का लहजा विचित्र था, उसकी बातें किसी के समझ में नहीं आती थीं। इस लिए बाद में उसे इमाम के पद से हटा दिया था।

मोहम्मद शफीक नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि मुजफ्फरनगर जाने से पहले वह यहां इमाम के तौर पर काम किया करता था। वह विवाह के लिए बेकरार था और परिचितों से विवाह कराने का आग्रह किया करता था। सन 2016 में जामा मस्जिद प्रशासन ने उसकी जामा मस्जिद में इमाम के पद पर नियुक्ति की थी। मस्जिद के एक सदस्य ने बताया कि वह 13 महीने पहले ही हमारे गांव आया था। मस्जिद में काफी समय से कोई इमाम नहीं था, इसलिए हमने इस पद को भरने के लिए विज्ञापन दिया था।

जिसके बाद ही उसकी इमाम के पद पर नियुक्ति हुई थी। उसने हमें यही बताया कि वह मूल रुप से असम का रहने वाला है। अब्दुल्ला केवल एक साल तक ही इमाम के रूप में काम कर पाया। उसके बोलने का ढंग काफी अलग था, जिससे स्थानीय मुस्लिमों को उसकी भाषा समझ में नहीं आती थी। लिहाजा इस साल रमजान के अंत में उसे इमाम के कार्यभार से मुक्ति दे दी गई। उसके कुछ दिनों बाद अब्दुल्ला मुजफ्फरनगर चला गया, जहां से उसे एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया।

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