स्कूलों में होगी शारीरिक शिक्षकों की बहाली : रघुवर दास

रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि बच्चे वोट बैंक नहीं हैं, इसी वजह से सरकारी स्कूलों के स्तर में गिरावट आयी है। राज्य को बदलना है तो शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा। सरकार की कोशिश है कि सरकारी स्कूल की दशा को बदला जाए। झारखण्ड की शिक्षा व्यवस्था में कला-संस्कृति, महापुरुषों की जीवनी को पाठ्यक्रम में जोड़ने का काम विभाग करे। श्री दास ने सोमवार को बाल समागम के समापन समारोह में कहा कि हर स्कूल में शारीरिक शिक्षक की बहाली होगी। सभी स्कूलों को टैब दिया जायेगा ताकि हर शिक्षक और छात्र एक साथ आधुनिक युग में कदम से कदम मिला कर चल सकें। उन्होंने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिये शिक्षकों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण देकर शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि 14 साल के बाद स्कूल में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिये 18000 से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति हुई है और यह प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के आधारभूत संरचना को भी बढ़ाने का काम किया जा रहा है। 40 हजार स्कूलों में बेंच डेस्क देने का काम अप्रैल से पहले पूरा कर लिया जायेगा और दो साल के अंदर 40 हजार स्कूलों को विद्युतीकृत कर दिया जायेगा। श्री दास ने कहा कि मिड डे मील में पहले दिक्कत होती थी। 2017-18 के बजट में सभी स्कूलों में गैस चूल्हा की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। अब किसी भी सरकारी काम में शिक्षकों को नहीं लगाया जायेगा। मौके पर मुख्यमंत्री ने मासिक बाल पत्रिका पंख का विमोचन किया और राज्य के 240 स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा का ऑनलाइन उद्घाटन किया। समापन समारोह में छात्रों द्वारा मार्च पास के साथ ही राजस्थानी व असमिया गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। श्री दास ने बाल समागम में बैंड टीम और सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करनेवाले ग्रुप को एक-एक लाख रुपये तथा राष्ट्रीय गान गाने वाली बच्ची रुचि कुमारी को 25 हजार रुपये पुरस्कार स्वरुप देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्थानों के साथ एमओयू कर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। शिक्षक राज्य के निर्माता हैं। शिक्षक नौकरी की भावना से काम न करें। इस सोच के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि स्कूल में जल्द बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होगा ताकि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि बाल समागम के माध्यम से गांव, प्रखंड, जिला और प्रदेश स्तर पर छिपी प्रतिभा को निखारने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियां बीच में पढाई छोड़ देती हैं क्योंकि स्कूल में शौचालय का अभाव था। लेकिन अब सभी स्कूलों में शौचालय बन चुका है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्र के अभिवावकों की पढाई के प्रति सोच भी बदली है। लड़कियां अपनी पढाई के प्रति चिंता करें, उनकी शादी की चिंता राज्य सरकार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि सभी सरकारी स्कूलों में अप्रैल से हेल्थ कैंप लगा कर छात्रों के स्वास्थ्य की जांच की जाये। श्री दास ने दिव्यांग बच्चे के प्रति सकारात्मक सोच रखने की समाज से अपील की। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से विभाग ने दिव्यांगों को किट देने का काम किया गया है। आज कंप्यूटर की महत्ता बढ़ी है। राज्य सरकार प्राथमिक स्कूल से ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के छात्रों और छात्राओं के लिए कंप्यूटर शिक्षा शुरू कर रही है। स्कूली शिक्षा व साक्षरता सचिव आराधना पटनायक ने कहा कि समागम के माध्यम से छात्र-छात्राओं की छिपी हुयी प्रतिभाओं को निखारना है। कार्यक्रम में विधायक गंगोत्री कुजुर व रामकुमार पाहन, राज्य परियोजना निदेशक मुकेश कुमार, निदेशक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मनीष रंजन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.