पद्मश्री बलबीर दत्त की पुस्तक ‘जयपाल सिंह एक रोमांचक अनकही कहानी’ का लोकार्पण

रांची: पद्मश्री बलबीर दत्त द्वारा लिखित पुस्तक जयपाल सिंह एक रोमांचक अनकही कहानी का रविवार को चेंबर भवन सभागार में मुख्य अतिथि झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. दिनेश उरांव ने लोकार्पण किया। इस मौके पर मुख्य वक्त्ता राज्य सभा सांसद एवं पूर्व प्रधान संपादक हरिवंश, पद्मश्री बलबीर दत्त, ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, विशिष्ट अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रमेश कुमार पाण्डेय, पूर्व प्रति कुलपति वीपी शरण एवं प्रभात प्रकाशन के डॉ. पीयूष कुमार उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए हरिवंश ने कहा कि भौतिक जीवन में पुस्तकों का बड़ा महत्व है। पुस्तकें राह दिखाती है उम्र बढ़ने पर मनोरंजन देता है किताबें हमें सहारा देती है हमारी निराशा को खत्म करता है जीवन जब बोझ लगने लगे को किताब ही ताकत देती है। उन्होने बलबीर दत्त की प्रशंसा करते हुए कहा कि बलबीर दत्त पत्रकारिता के बुनियादी वसूलों के प्रतीक हैं। बलबीर दत्त ने तथ्यों के साथ जयपाल सिंह पर पुस्तक लिखी। बड़े ही रोचक शैली में जयपाल सिंह की कमियों एवं खामियों पर पुस्तक लिखी गयी है। चार खंड और बारह अध्याय की पुस्तक है जिसमें 370 पेज है। पुस्तक में दुर्लभ दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।

उन्होने कहा कि जयपाल सिंह, बिरसा मुंडा के बाद जिनियस व्यक्ति थे। झारखंड के आदिवासियों के प्रति काफी लगाव था। वे झारखंड के गौरव थे। इतिहास इसका जीवंत उदाहरण है। समारोह में मुख्य अतिथि झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. दिनेश उरांव ने कहा कि पुस्तक का लोकार्पण करना मेरे जीवन का बड़ा दिन है। बलबीर दत्त ने इस पुस्तक में बहुत सारी जानकारी दी है तथ्यों के साथ सारगर्भित बातों को रखा है। आदिवासी महासभा का भी जिक्र किया गया है। उन्होने बलबीर दत्त को इस पुस्तक के लेखन पर बधाई दी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा को आदिवासी समाज में आदर्श के रुप में मानते हैं।

लोकार्पण समारोह में आना मेरा सौभाग्य है हमारे पूरखा के प्रति पुस्तक में जानकारी दी गयी है। निगेटिव एवं पोजिटिव दोनों बातें शामिल हैं। पुस्तक में सारी जानकारी सराहनीय है। श्री मुंडा ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा संत पॉल स्कूल से पढ़ाई की यह मुझे नहीं पता था इस पुस्तक से जानकारी मिली मैने भी संत पॉल स्कूल से पढ़ाई की है। उन्होने कहा कि जयपाल सिंह के आर्शीवाद से ही मेरे पिता खूंटी क्षेत्र से विधायक बने और आज तक हमसबों को आर्शीवाद मिल रहा है। उन्होने कहा कि जयपाल सिंह को आदर्श मानते हैं। बलबीर दत्त को इस पुस्तक के लिए बधाई दी। समारोह को संबोधित करते हुए पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि जयपाल सिंह में कुछ कमियां एवं खूबियां थी। पुस्तक में खामियों का जिक्र किया गया है। किस दिशा में जाना है उन्हें पता नहीं था एक समय था जब वे चलते थे तो लाखों लोग उनके पीछे चलते थे। जयपाल सिंह की सबसे बड़ी गलती थी कि वे पार्टी की कमान अपने पास रखते थे किसी की सलाह का परवाह नहीं करते थे।

1963 ई. में जब पार्टी का विलय कांग्रेस में किया गया तो उन्होने प्रेसवालों से कहा कि किसी बड़ी पार्टी के साथ मिलकर काम करना चाहता था। कहां हिन्दू महासभा, कहां ब्रिटिश , कहां मुस्लिम लीग सभी से बात कर रहे थे। झारखंड पार्टी में एकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि 1963 से 2000 तक झारखंड के राजनीतिज्ञों ने कुछ नहीं सीखा। झारखंड मोमेन्टम में तीन लाख करोड़ के एमओयू किया गया उस समारोह में एक भी विपक्ष के नेता नहीं थे। उन्होने कहा कि किताब में कई कड़वी बातें हैं। इतिहास से हमें सिखने की जरुरत है। समारोह को बीपी शरण ने भी संबोधित करते हुए पुस्तक की प्रशंसा की और कहा कि बहुत सारी जानकारी है जो अनकही है। जयपाल सिंह की कमियों एवं कमजोरी पर प्रकाश डाला गया है।

विशिष्ट अतिथि कुलपति डॉ. रमेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि जयपाल सिंह का जो चरित्र रहा है वह शोध का विषय रहा है। रांची विश्वविद्यालय के विद्याथी इस पर शोध करें। जयपाल सिंह पर शोध करने की जरुरत है। समारोह स्वागत एवं अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रभात प्रकाशन के डॉ.पीयूष कुमार ने दिया। कार्यक्रम का संचालन संजय झा ने किया। समारोह में लेखक श्रवण गोस्वामी, अशोक प्रियदर्शी, पत्रकार बैजनाथ मिश्र, उदय वर्मा, विजय भास्कर, धर्मराज राय, डॉ. महुआ मांजी,भाजपा नेता दीपक प्रकाश, डॉ. सतीश मिठ्ठा,हुसैन कच्छी, डॉ. भूनेशवर अनूज, गिरधारी लाल गौंझू सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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