लिट्टीपाड़ा उपचुनाव में झामुमो और भाजपा के बीच हो सकती है सीधी टक्कर

लिट्टीपाड़ा: झारखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए संतालपरगना में लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव इन दिनों प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।

भाजपा संतालपरगना को झामुमो मुक्त बनाने का आह्वान करते हुये इस क्षेत्र में झामुमो को परास्त करने के लिए दिन रात एक किये हुए है वहीं झामुमो अपनी परम्परागत सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए चैत की गर्मी की परवाह किये बगैर पसीना बहा रहा है। भाजपा ने 09 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में कभी झामुमो के कद्दावर नेता रहे पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है तो झामुमो ने भी पुराने योद्धा और इस सीट पर वर्ष 1977 से लगातार कब्जा कायम रखनेवाले साईमन मरांडी को उतारा है। इस क्षेत्र में उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही झामुमो और भाजपा के बीच आरोप- प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दोनों दलों के बीच शुरू हुई जुबानी जंग से इस क्षेत्र में सीधी टक्कर में असार बन गये है।

लिट्टीपाड़ा में वर्ष 1977 में हुये विधानसभा चुनाव में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार साईमन मरांडी ने पहली बार अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय मरांग मुर्मू को शुभ अंक महज 151 मतों के अंतर से परास्त कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। इसके बाद वर्ष 1980 में साईमन मरांडी झामुमो के तीर-धनुष चुनाव चिन्ह से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी किस्टो चन्द्र मालतो को 7,857 मतों के अंतर से परास्त कर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। इस चुनाव में पहली बार मैदान में उतरे भाजपा प्रत्याशी पॉउल हांसदा को महज 619 मतों से ही संतोष करना पड़ा था। वर्ष 1985 में झामुमो के टिकट पर साईमन मरांडी ने लगभग 17,814 मतों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को पछाड़ा। वर्ष 1989 में साईमन मरांडी राजमहल लोकसभा सीट से सांसद चुने गये।

इसके बाद झामुमो ने वर्ष 1990 में लिट्टीपाड़ा सीट पर श्री हांसदा की पत्नी सुशीला हांसदा को अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में भी श्रीमती हांसदा झामुमो का मजबूत किला बचाने में सफल हुई। वर्ष 1990 में श्रीमती हांसदा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी झानो रेवती टुडू को 17,100 मतों से भारी शिकस्त देकर विधायक चुनी गयीं। वर्ष 1995 में झामुमो की टिकट पर दूसरी बार मैदान में उतरी श्रीमती हांसदा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी फिलीचुनियस हेम्ब्रम को 5,717 मतों से पराजित किया जबकि भाजपा के सोम मरांडी 9,366 मत लाकर तीसरे स्थान पर रहे।

वर्ष 2000 में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में झामुमो की सुशीला हांसदा ने लगभग 30,436 मत प्राप्त कर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ दिया और लगातार तीसरी बार विधायक चुनी गयीं। वर्ष 2005 में सम्पन्न चुनाव में भी झामुमो ने श्रीमती हांसदा को चौथी बार इस क्षेत्र से मैदान में उतारा। इस बार सुशीला ने 29,661 वोट प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सोम मरांडी को 6197 मतों से परास्त किया और चौथी बार विधायक चुनी गयीं। हालांकि इस चुनाव में 11 प्रत्याशियों के मैदान में रहने के बावजूद झामुमो और भाजपा के बीच सीधी टक्कर हुई जिसमें सोम मरांडी पूर्व की अपेक्षा 22,464 वोट लाने में सफल हुए।

झामुमो ने वर्ष 2009 में अपने पुराने योद्धा और सुशीला हांसदा के पिता साईमन मरांडी को पुन: मैदान में उतारा। इस चुनाव में झामुमो नेता साईमन मरांडी और कांग्रेस की टिकट पर मैदान में उतरे डॉ. अनिल मरांडी के बीच सीधी टक्कर हुई और भाजपा के ठाकुर हांसदा तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में श्री मरांडी 29,875 वोट बटोरने में सफल रहे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी श्री मुर्मू 24,478 वोट ही प्राप्त कर पाये जबकि भाजपा को महज 18,842 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

श्री मरांडी वर्ष 2014 में झामुमो छोड़ भाजपा में शामिल हो गये। इस चुनाव में झामुमो ने कांग्रेस के पुराने योद्धा और विधानसभा चुनाव के महज कुछ दिन पूर्व झाविमो छोड़ झामुमो में शामिल हुए डॉ.अनिल मुर्मू को अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में झामुमो की टिकट पर डॉ. मुर्मू ने रिकॉर्ड 25,083 मतों के अंतर से 1977 से लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करनेवाले भाजपा प्रत्याशी साईमन मरांडी को पराजित कर झामुमो के दुर्ग को बचाने में सफल हुए। 17 जनवरी 2017 को डा.मुर्मू का निधन हो जाने के कारण इस क्षेत्र में उपचुनाव कराया जा रहा है।

वर्तमान में राज्य में भाजपा की सरकार है और झारखंड विधानसभा में झामुमो मुख्य विपक्षी पार्टी है। इस कारण यह उपचुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। बदले राजनीतिक समीकरण के बीच भाजपा प्रत्याशी के रूप में इस उपचुनाव में पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू मैदान में है जबकि झामुमो के साईमन मरांडी सहित कुल दस प्रत्याशी अपने भाग्य की आजमाइश कर रहे हैं।

भाजपा ने लगभग 40 वर्षों से झामुमो के गढ़ को ध्वस्त करने की रणनीति बनायी है और राज्य के मुख्यमंत्री, कई मंत्री, कई विधायकों के साथ कई प्रमुख नेता को जनसम्पर्क अभियान में लगा दिया है। वहीं, झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के साथ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन, विधायक प्रो.स्टीफन मरांडी, पार्टी के सचेतक नलिन सोरेन सहित पार्टी के कई विधायक और प्रमुख नेता लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। भाजपा अपनी चुनावी रणनीति के तहत दिवंगत विधायक की एक पत्नी और उनकी बेटी को पार्टी में शामिल कर महिला शक्ति का अपमान करने का आरोप लगाकर झामुमो को घेरने का प्रयास कर रही है। वहीं, झामुमो दिवंगत विधायक डॉ. मुर्मू की दूसरी पत्नी को अपने साथ कर प्रचार अभियान में उतार दिया है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास स्वयं प्रचार अभियान की कमान संभाले हुए हैं जबकि झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन अपनी परम्परागत सीट को बरकार रखने के लिए दिन-रात जनसम्पर्क अभियान का संचालन करने में जुटे है। भाजपा 40 वर्षों से लिट्टीपाड़ा की जनता को विकास से महरूम रखने के लिए झामुमो और उसके प्रत्याशी साईमन मरांडी को जिम्मेवार बताकर झामुमो मुक्त संतालपरगना बनाने का आह्वान कर रही है।

वहीं, भाजपा सरकार के ढाई साल के शासन काल को झामुमो झारखंड और झारखंड की जनता के हितों का विरोधी करार देते हुए छोटानागपुर काश्तकरी अधिनियम (सीएनटी)और संतालपरगना काश्तकरी अधिनियम (एसपीटी) में संशोधन किये जाने के मसले पर जनता को गोलबंद करने के प्रयास में जुटा है। देखना दिलचस्प होगा कि लिट्टीपाड़ा क्षेत्र से महज 151 मतों के शुभ अंकों के अंतर से प्रथम बार विजयी होकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करनेवाले साईमन मरांडी झामुमो का यह मजबूत किला बचा पाते हैं या नहीं। वहीं, भाकपा और झामुमो से राजनीति का ककहरा सीखनेवाले संतालपरगना की राजनीति के पुराने खिलाड़ी भाजपा प्रत्याशी हेमलाल मुर्मू उत्तर प्रदेश में हाल में चली मोदी लहर का लाभ उठा पाते है या नहीं। यह 13 अप्रैल को मतगणना के बाद ही स्पष्ट ही पायेगा।

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