CBSE की तर्ज पर JAC ने रिजल्ट तैयार कर विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगाया

रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की लापरवाही के चलते मैट्रिक के हजारोें विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया था। हजारों विद्यार्थियों के चेहरे पर निराशा के बादल छा गये थे। हालांकि शुक्रवार की सुबह ऐसे विद्यार्थियों के लिए नयी किरण बनकर आया। JAC ने संशोधित रिजल्ट का प्रकाशन कर दिया।

संशोधित रिजल्ट में और 27 हजार विद्यार्थी उत्तीर्ण किये गये। दरअसल, रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी को JAC के नियमों की जानकारी तक नहीं थी। एजेंसी ने CBSE की तर्ज पर रिजल्ट तैयार कर दिया था। मगर, बाद में JAC को अपनी गलतियों का अहसास हुआ, तो आनन-फानन में संशोधित रिजल्ट का प्रकाशन किया।

स्कूली शिक्षा सचिव अराधना पटनायक ने इसे गंभीरता से लिया है। JAC अधिकारियों से उन्होंने जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। कहां पर गलती हुई रिजल्ट तैयार कर रही एजेंसी को JAC मैनुअल की जानकारी नहीं दी गई थी। एजेंसी से बेस्ट फाइव सब्जेक्टस पर रिजल्ट देने को कहा गया था।

 जिसके चलते सीबीएसई की तर्ज पर सभी पांच बेस्ट विषयों को अनिवार्य करते हुए रिजल्ट जारी कर दिया गया। जिस कारण 50 हजार से ज्यादा छात्र फेल हो गए।

नियमावली यह कहती है कि यदि किसी विद्यार्थी को अंग्रेजी में पास मार्क्स नहीं है और वह संस्कृत में पास मार्क्स लाया है, तो ओवरऑल परीक्षा में उसे उत्तीर्ण किया जायेगा। मैट्रिक की परीक्षा में 27 हजार विद्यार्थी ऐसे थे, जिन्हें अग्रेजी में पास मार्क्स नहीं था, पर उन्हें संस्कृत में पास मार्क्स था। इसके बावजूद एजेंसी ने अपने रिजल्ट में ऐसे विद्यार्थियों को फेल कर दिया था।

जब यह बात सामने आयी तो संशोधित रिजल्ट में उन्हें उत्तीर्ण किया गया। संशोधित रिजल्ट में करीब 27 हजार विद्यार्थी पास हुये हैं। इससे मैट्रिक की परीक्षा में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत 67.91 प्रतिशत तक हो गया है।

पूर्व में जारी रिजल्ट में अंग्रेजी भाषा में 32361 विद्यार्थी फेल थे। लेकिन पिछली देर रात जारी रिजल्ट में 27 हजार विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा में पास होने की वजह से पास कर दिया गया। वे सभी दो भाषाओं में से किसी एक भाषा में फेल थे, किंतु अतिरिक्त भाषा में पास थे।

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