झारखंड सरकार दोनों से लूट रही: बाबूलाल मरांडी

पहले ही महीने शराब के व्यापार में 53 करोड़ के राजस्व का लगाया चूना

रांची: झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि रघुवर सरकार राज्य को दोनों हाथों से लूट रही है. संयुक्त बिहार के वक्त भी झारखंड को इतना नहीं लूटा गया, जिस कदर यह सरकार राज्य को लूट रही है. उन्होंने कहा कि एक अगस्त से सरकार ने शराब का कारोबार अपने हाथ में लिया है. पूरे अगस्त महीने में शराब से आयी रेवेन्यू का डाटा कलेक्ट किया गया तो पाया गया कि एक महीने में 27 करोड़ 80 लाख रुपये राजस्व आया, जबकि अगस्त 2016 का रेवेन्यू इससे काफी ज्यादा है. पिछले अगस्त में शराब से उत्पाद विभाग को 78 करोड़ 35 लाख रुपये रेवेन्यू प्राप्त हुआ था.

27.80 करोड़ रुपये का राजस्व उगाही करने में खर्च कर दिये 2.82 करोड़ रुपये

बाबूलाल ने कहा कि अगस्त 2016 की तुलना में अगस्त 2017 में सरकारी खजाने को 53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. यह 53 करोड़ रुपये अफसरों की जेब में गया है, जबकि मुख्यमंत्री खुद इस विभाग के मंत्री हैं. बाबूलाल ने कहा कि सरकार ने शराब बेचने के लिए 600 कर्मचारियों को रखा है. इनके वेतन मद में 2 करोड़ 52 लाख रुपये और दुकानों के किराये में अलग से खर्च किया गया. कुल मिलाकर 2 करोड़ 82 लाख रुपये खर्च कर सरकार ने 27 करोड़ 80 लाख रुपये का रेवेन्यू प्राप्त किया है. लूट का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है.

  • स्मार्ट सिटी का शिलान्यास भी लूट

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार उप राष्ट्रपति के हाथो स्मार्ट सिटी का शिलान्यास करवाने जा रही है, जबकि स्मार्ट सिटी का शिलान्यास भी लूट ही है. उन्होंने कहा कि 1955 से 1959 तक करीब 1200 एकड़ जमीन सरकार ने एचईसी और हटिया डैम के लिए अधिग्रहण किया था. इसमें से काफी जमीन का उपयोग नहीं हो पाया. अब सरकार उस जमीन का व्यवसायिक उपयोग कर रही है. सीएसएफ को जमीन बेची गयी, फिर 31 एकड़ जमीन जेएसससीए को दिया गया. उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक जिस जमीन का उपयोग नहीं हुआ वह रैयतों को वापस दे दिया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ऐसा न कर बेशर्मों की तरह जमीन लूट रही है.

  • हाउसिंग बोर्ड की जमीन का हो रहा व्यवसायिक उपयोग

मरांडी ने हाउसिंग बोर्ड की जमीन में भी लूट का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि 1961-62 में हाउसिंग बोर्ड ने रांची में 512 एकड़, जमशेदपुर में 720 एकड़, पलामू में 46 एकड़, हजारीबाग में 24 एकड़, बोकारो में 31 एकड़, गोमिया में 72 एकड़ और धनबाद में 57 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. यह जमीन वैसे लोगों को घर बनाकर देने के लिए अधिग्रहित किया गया था, जिनके पास घर नहीं है. लेकिन हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर गरीबों को घर नहीं मिल रहा, बल्कि उनपर अपार्टमेंट बनाकर सरकार व्यापार कर रही है.

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