सरहुलमय हुई राजधानी, अखरा में तब्दील हुआ मेन रोड, खूब झूमी रांची

विशाल सरहुल शोभायात्रा में उमड़ा जन सैलाब

रांची: सोमवार को सरहुल पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह पाहनों ने सबसे पहले नये घड़े में रखे पानी को देखा और वर्षा की भविष्यवाणी की। उसके बाद पूरे विधि-विधान से सरहुल पूजा की। पूजा के बाद राजधानी रांची में दोपहर को सरहुल की विशाल शोभायात्रा निकाली गयी। जिसमें जन सैलाब उमड़ पड़ा। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो मेन रोड अखरा में तब्दील हो गया हो। क्या युवा, क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग सभी सरहुल नृत्य में मशगूल दिखे। नृत्य करने की ऐसी दीवानगी शायद ही देखने को मिले। पूरी रांची थिरकती नजर आयी। सरहुल गीत, नृत्य से राजधानी सराबोर रही।

युवतियों के सजे बाल बयां कर रहे थे कि सरई फूल जंगल में नहीं रांची के मेन में अपनी शोभा बढ़ा रहा है। लाल पाड़ साड़ी के साथ उनकी वेश-भूषा सरहुल गाथा बता रही थी, तो युवकों के ताल थिरकन में साथ दे रही थी। गायन, वादन और नर्तन ये बता रहे थे अभी आदिवासी युवा अपनी संस्कृति से कटे नहीं हैं। शानदार वादन के साथ अखरा नृत्य शैली सड़कों पर देखने को कभी-कभी कभार ही मिलते हैं। कभी ऐसा नहीं लगा कि लोग सड़क पर नृत्य कर रहे हैं। अपनी समृद्ध संस्कृति के साथ जुड़े रहने एहसास करा रही थी। सरहुल शोभायात्रा में ताल-लय का गजब का सम्मिश्रण रहा। एक साथ पैर थिरक रहे थे। उनके थिरकन देख दर्शकों में सरहुल की उर्जा का संचार हो गया।

हतमा मौजा से सबसे पहले पहले दोपहर एक बजे शोभायात्रा निकाली गयी। इसके बाद रांची और आसपास के बस्तियों से लोग शोभायात्रा में नृत्य करते शामिल हुए। शोभायात्रा सिरोमटोली तक गयी। जहां पर पाहनों ने पूजा अर्चना की और खोड़हा नृत्य के बाद वापस अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किये। सरहुल शोभायात्रा को सफल बनाने में कई आदिवासी संगठनों ने अपनी भूमिक निभायी।

सरहुल गीतों की रही धूम
सरहुल पर्व और शोभायात्रा के दौरान सरहुल गीतों की बहार रही। नागपुरी के साथ मुंडारी, कुडु़ख, हो आदि भाषाओं में सरहुल गीत गाये गये। जिस पर युवाओं ने अपनी ताल दी। महुआ रे महुआ पतई महुआ पतई सबे झइर गेल, जदुर दिना जदुर खेइल ले गुइया से मठा दिना मठा खेइल रे, सरई फूल फूइल गेलक दादा, एंदेर पूंपन मेझेरकी पेलो, भगजोगनी लेखा लवकरकी बरआ लगदी रे आदि गीत गाये गये। इस अवसर पर आधुनिक नागपुरी गीतों के साथ खूब नृत्य किये गये। युवाओं ने रिकॉर्ड गीतों पर सरहुल का आनंद लिया। हालांकि, पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के साथ उन्होंने खूब मस्ती की। ढोल,नगाड़े को बड़े शौक से बजाते नजर आये।

पारंपरिक वेश-भूषा की झलक
आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, परंपरा और वेश-भूषा को लेकर काफी सजग और गंभीर रहा है। इसकी बानगी सरहुल शोभायात्रा के दौरान दिखी। लोग पारंपरिक श्रृंगार से सजे थे। जो उनकी शोभा बढ़ा रही थी। बइंहकल, हंसली पहने खूब भा रहे थे। वहीं हरा, पीला, गुलाबी फीता बांधे युवा लोगों का ध्यान खींच रहे थे।

झांकी में दिखी जल, जंगल, जमीन से जुड़े रहने का संदेश
सरहुल शोभायात्रा में कुछ बस्तियों से झांकी निकाली गयी। जिसमें जल, जंगल, जमीन से जुड़े रहने का संदेश दिया। झांकी में प्रकृति, पर्यावरण को मनुष्य जीवन का अस्तित्व बताया गया। साथ ही उसी से जुड़े रहने का संदेश दिया। वहीं, मिसाईल का प्रदर्शन किया। वहीं, पत्रकारों का बैनर लगाकर श्रद्धांजलि दी।

राज्यपाल ने असरीता टूटी को सरहुल के अवसर पर याद किया
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में सरहुल महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। सर्वप्रथम उन्होंने विभाग की सहायक प्रोफेसर असरीता टूटी क ो श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके साथ किये नृत्य का स्मरण करते हुए कहा कि असीम प्रतिभा की धनी व्यक्तित्व को विभाग ने खो दिया है। बता दें 2018 में असरीता टूटी का निधन दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के कारण हो गया था। वो नगाड़ा बजाने के साथ गाने और ट्रैक्टर एवं बुलेट चलाने में माहिर थीं। उन्होंने कहा कि सरहुल सामूहिकता त्योहार है। आज यह त्योहार बड़ा रूप धारण कर लिया है। इसे देश-विदेश के लोग भी जानने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के इस युग में लोग पर्यावरण को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में यह त्योहार राह दिखाने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि इसके निदान के लिए पेड़ लगायें और उसकी देखभाल करें। वहीं, कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने आये अतिथियों का स्वागत करते हुए सरहुल का त्योहार जीयो और जीने दो का संदेश देता है। इस अवसर पर डॉ गिरिधारी राम गौंझू, डॉ केसी टुडू, डॉ त्रिवेणीनाथ साहू की अगुवाई में सरहुल मंत्र पाठ किया गया। इसके बाद विभाग के नौ भाषाओं के विद्यार्थियों ने सरहुल गीत-नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ हरि उरांव ने किया। मौके पर प्रति कुलपति डॉ कामिनी कुमार, डॉ उमेश नंद तिवारी सहित शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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