विधानसभा चुनाव: झारखंड में सीटों का झगड़ा एनडीए और यूपीए में खलबली

रांची: झारखंड में होनेवाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के साथ ही भाजपा आजसू के मजबूत गठबंधन में सीटों को लेकर खटराग शुरू हो गया है। यही स्थिति यूपीए गठबंधन के घटक दलों में भी है। जिन बड़े दलों ने जिसमें खासकर भाजपा, कांग्रेस और झामुमो मुख्य रूप से शामिल हैं, उनकी उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही पार्टी के अंदर खलबली मच गई है। वैसे नेता जिन्हें इन दलों से टिकट नहीं मिला, वे दनादन दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा फायदा झाविमो और आजसू को हो रहा है। भाजपा के 52 उम्मीदवारों की प्रथम सूची सामने आने के बाद 11 नवंबर से आजसू अपने तेवर में है और एक एक कर सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर रहा है। आजसू ने सर्वप्रथम भाजपा की लोहरदगा सीट पर अपना उमीमदवार दे दिया।

फिर एक के बाद एक भाजपा के पांच सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़ा करने की घोषणा भी कर दी। यही नहीं 12 नवंबर को आजसू ने छत्तरपुर सीट से भाजपा के प्रबल दावेदार रहे पूर्व विधायक राधाकृष्ण किशोर को टिकट देकर उन्हें अपना उम्मीदवार बना दिया। भाजपा के और भी कई नेता आजसू के संपर्क में हैं। आजसू के इस तेवर को देख कर भाजपा नरम पड़ गई है। सूत्रों की मानें तो आजसू को 10 सीटें देने पर भाजपा सहमत हो गई है। साथ ही कुछ सीटों पर दोस्ताना संघर्ष की बात कह रही है। पर आजसू अपने रुख पर अड़ा है और 19 सीटों से कम पर समझौता नहीं करने के मूड में है।

10 सीटें और दोस्ताना संघर्ष की बात पर आजसू प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत बिफर पड़े। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ आजसू मजबूत गठबंधन चाह रहा है, मजबूर नहीं। दोस्ताना संघर्ष की बात पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में दोस्ताना संघर्ष कोई मायने नहीं रखता। गाड़ी की एक सीट पर दो सवारी नहीं बैठते। ऐसा कहीं कोई नियम भी नहीं है। यदि कोई बैठता है तो आजसू उस दूसरी सवारी को गाड़ी से उतरवाएगी। हमने तो सीट पहले से आरक्षित करवा रखी है, भाजपा तो आरएसी वाले हैं। भगत ने कहा कि आजसू भाजपा की कमजोर सहयोगी नहीं है। हमलोग दुबले-पतले लोग नहीं हैं, हम छोटे हैं पर मजबूत हैं।

परंतु, यदि बड़ा भाई छोटा भाई का खेत कब्जा करेगा तो हम बड़का भाई के खेत को भी जोतेंगे। पिछली बार भाजपा अपने बहुमत के आंकड़े नहीं छू पाई, इसलिए बाहर से समर्थन जुटाना पड़ा। इस बार एनडीए को सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। आजसू अपने बड़े भाई को आश्वस्त कर रहा है कि इस बार कहीं बाहर ताकने-झांकने की जरूरत नहीं। इस बार आजसू इतनी सीटों पर जीत दर्ज करेगा कि अपने बड़े भाई का सिर शर्म से झुकने नहीं देगा।

इधर कांग्रेस में पूरा उथल-पुथल है। नेता तो दूसरे दलों में भाग ही रहे हैं। रांची सहित कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता उम्मीदवारों को लेकर पार्टी के निर्णय के विरोध में आगबबूला हैं। कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया, तो कई पार्टी छोड़ने का एलान भी कर चुके हैं। यही हाल झामुमो का भी है। पाकुड़ से झामुमो के पूर्व विधायक रहे अकिल अख्तर ने आज आजसू का दामन थाम लिया है। अभी तो यह शुरुआत मानी जा रहा है। प्रथम दो चरणों मे ही भाजपा, कांग्रेस और झामुमो जैसे बड़े दलों में इतनी टूट-फूट हो रही है, तो पता नहीं, अगले तीन चरणों में उम्मीदवार घोषित करने के बाद इन दलों में क्या स्थिति देखने को मिलेगी।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.