भाजपा-आजसू गठबंधन समाप्त, बीजेपी अब 80 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव में आजसू के गुरिल्ला वार ने भाजपा समेत तमाम विपक्षी दलों को सकते में डाल दिया है। आजसू ने सबसे पहला सर्जिकल स्ट्राइक भाजपा पर ही किया, जब उसने छत्तरपुर के निवर्तमान विधायक और भाजपा के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर को अपने खेमे में लाकर छतरपुर विधानसभा सीट से अपना सिंबल देकर प्रत्याशी बना दिया। लोहरदगा में भी भाजपा के खिलाफ नीरू शंति भगत का नामांकन करा दिया। यही नहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ के खिलाफ भी उम्मीदवार की घोषणा कर दी।

इसके बाद तो आजसू खेमे में दूसरे दलों के भी वैसे नेताओं की भीड़ उमड़ने लगी, जिन्हें अपने दल के टिकट से वंचित होना पड़ा। इसमें झामुमो के पूर्व विधायक अकील अख्तर, कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मानस सिन्हा भी शामिल हैं। आज तो कांग्रेस में सबसे ज्यादा समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहनेवाले पूर्व सांसद और विधायक प्रदीप बलमुचू ने भी आजसू का दामन थाम लिया। आजसू द्वारा लिए जा रहे इस तरह के दनान्दन फैसले से भाजपा की हलचल बढ़ गई है। इतना ही नहीं भाजपा के चुनाव प्रभारी ओम माथुर को आज शाम इस डैमेज कंट्रोल के लिए रांची आना पड़ रहा है। झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 से ऐन पहले भाजपा-आजसू का गठबंधन टूट गया है। भारतीय जनता पार्टी अब कुल 80 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी।

ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बनी जिसके बाद दोनों ने साथ चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। पहली बार ऐसा होगा जब भाजपा और आजसू एक साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साल 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद से ही भाजपा-आजसू साथ मिलकर चुनाव लड़ते आए हैं।भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और उपाध्यक्ष ओम माथुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

बताया जा रहा है कि भाजपा एक निर्दलीय उम्मीदवार विनोद सिंह को समर्थन देने के पक्ष में है। पहले यह सीट बीजेपी ने आजसू के लिए छोड़ी थी। भाजपा ने राज्य की कुल 81 विधानसभा सीटों में से 53 प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुकी है, जबकि आजसू ने भी 12 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।

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