अंतरराज्जीय साइबर गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार

एसबीआई, सीएमपीडीआई ब्रांच का मुख्य प्रबंधक अमित मिश्रा बनकर लगाया था सतेंद्र किशोर को चूना

खबर मन्त्र संवाददाता
रांची। राजधानी में साइबर अपराधी की घटना पर ब्रेक के लिए रांची पुलिस लगातार प्रयासरत है। रांची पुलिस ने गोंदा थाना में सतेंद्र किशोर से हुए साइबर क्राइम मामले में कार्रवाई करते हुए अंतरराज्जीय साइबर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसमें सप्लायर विवेक कुमार मंडल और आमिर खुसरो शामिल हैं। दोनों को पुलिस ने देवघर में छापेमारी कर पकड़ा है। पकड़े गये अपराधियों की निशानदेही पर पेटीएम कार्ड 20 पीस, फर्जी सिम कार्ड 20 पीस, मोबाइल पांच और नकद 15,100 रुपये बरामद किये गये। यह जानकारी एसएसपी अनीश गुप्ता ने प्रेसवार्ता में बुधवार पत्रकारों को दी। उन्होंने कहा कि साइबर सेल, रांची की डीएसपी यशोधरा के नेतृत्व में गठित टीम ने साइबर अपराधियों को पकड़ा है।

साइबर अपराधी ने एसबीआई, सीएमपीडीआई ब्रांच का मुख्य प्रबंधक अमित मिश्रा बनकर पीड़ित सतेंद्र किशोर को चूना लगाया था। हालांकि, इस गिरोह के बाकी सदस्य अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जिसमें सरगना कोलकाता निवासी सुशांत दास, देवघर के पालाजोरी निवासी शमीम अंसारी, फरीद अंसारी और वसीम अंसारी शामिल हैं। पुलिस गिरोह के सदस्यों को दबोचने के लिए प्रयासरत है। छापेमारी टीम में इंस्पेक्टर साइबर सेल नीतीश कुमार, एसआई गोंदा थाना सुनील कुमार पांडेय, सिपाही दीपक कुमार, संदीप कुमार, कमलेश कुमार और विफे उरांव शामिल हैं।

एसएसपी ने कहा कि साइबर अपराधी ने सतेंद्र किशोर से शातिर अंदाज में फंसा कर साइबर ठगी की। पहले तो एसबीआई, सीएमपीडीआई ब्रांच का मुख्य प्रबंधक अमित मिश्रा बनकर बातचीत की। इसके बाद आधार रजिस्टर कराने के नाम पर योनो एकाउंट में इंटरनेट बैंकिंग का लॉगिग करने को कहा। इससे पूर्व प्ले स्टोर से एनीडेस्क एप डायनलोड कर ऑनलाइन एसबीआई एनी वेयर में लॉगिंग करने के लिए बोला। साइबर अपराधी के झांसे में आकर पीड़ित सतेंद्र साइबर अपराधी के कहने अनुसार करने लगा। साइबर अपराधी ने योनो एप का प्रोफाइल पासवर्ड शेयर करते हुए आगे पूछताछ करने लगा। इस पर पीड़ित सतेंद्र को शक हुआ तो बैंक शाखा प्रबंधक से मिलने की बात साइबर अपराधी से बोला। इसपर साइबर अपराधी ने बैंक आने का आग्रह किया। फिर बातचीत करते हुए साइबर अपराधी ने आईएमपीएस के माध्यम से 25 हजार की अवैध निकासी कर ली। पीड़ित के मोबाइल पर पैसों की निकासी का मैसेज आया, तो गोंदा थाना को पूरे मामले की जानकारी दी।

कोलकाता का सुशांत दास है मुख्य सप्लायर
एसएसपी ने कहा कि अंतरराज्जीय साइबर गिरोह को पेटीएम कार्ड और सिम कोलकाता निवासी सुशांत दास उपलब्ध कराता है। सुशांत कोलकाता में 4 हजार रुपये देकर पेटीएम और सिम का कोम्बो पैकेट की खरीदारी करता है। इसके बाद यह कोम्बो पैकेट सुशांत साइबर अपराधी को उपलब्ध कराता है। साइबर अपराधी सुशांत से यह कोम्बो पैकेट खरीदने के बाद 8 हजार में दूसरों को बेचते हंै। यह पेटीएम कार्ड और सिम किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर निर्गत हुआ होता है, जो कर्मचारियों की मिलीभगत से यह कोम्बो पैकेट साइबर अपराधी तक पहुंचता है।

एनी डेस्क एप से साइबर अपराधी कैसे करते है ठगी
एसएसपी ने कहा कि साइबर अपराधी स्वयं को बैंक अधिकारी बता कर केवाईसी अपडेट, आधार अपडेट, एटीएम एक्टिवेट कराने के नाम पर एनी डेस्क एप को प्ले स्टोर के माध्यम से डाउनलोड कराते हैं। इसके बाद साइबर अपराधी पीड़ित के मोबाइल को रिमॉट पर लेकर संचालित करते हंै। वहीं, बैंक द्वारा मोबाइल पर भेजे जा रहे ओटीपी को देख पाते हैं। इसमें साइबर अपराधी को ओटीपी पूछने की जरूरत भी नहीं होती है। जबकि, पुलिस जांच में पाया गया है कि एनी डेस्क एप रिमोट कंट्रोल एप्लीकेशन है। आरबीआई द्वारा भी एनी डेस्क एप से हो रहे साइबर अपराध के बारे में इसी वर्ष 2019 में एक एडवाइजरी जारी किया है कि एनी डेस्क एप को कोई भी उपभोक्ता किसी के द्वारा फोन में बताये जाने पर अपने मोबाइल में डाउनलोड न करें।

मोबाइल पर बैंक से संबंधित जानकारी मांगने पर पुलिस को दें सूचना
एसएसपी अनीश गुप्ता ने रांचीवासियों से अपील कि है कि मोबाइल पर बैंक से संबंधित किसी प्रकार की जानकारी शेयर न करें। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर साइबर अपराधी यह कॉल कर रहे हैं। किसी प्रकार की जानकारी बैंक से संबंधित मांगते हैं, तो अविलंब मामले की जानकारी पुलिस को दें। अन्यथा संबंधित बैंक के शाखा प्रबंधक को इस बात की जानकारी दें। इसके अलावा भी मोबाइल पर लगातार कॉल आता है तो रांची पुलिस के टोल फ्री नंबर 8987790674 पर सूचना दें।

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