राजा महाराणा प्रताप पर विशेष…

नई दिल्ली [खबर मंत्र स्पेशल]: मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप का जन्म 1540 में 6 जून को हुआ था। अपने शौर्य, पराक्रम और बहादुरी के लिए पहचाने जाने वाले अमर बलिदानी राजा महाराणा प्रताप एक ऐसा नाम है, जिनकी कहानियों से इतिहास के पन्ने भरे हुए हैं। उन पर बहुत सी फिल्में बनीं, शोध हुए और कई भाषाओं में किताबें भी लिखी गईं। बावजूद आज भी लोग महाराणा प्रताप के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं। आज भी देशवासी महाराणा प्रताप का नाम गर्व से लेते हैं और उनका नाम लेते ही रगों में देशभक्ति और बहादुरी अपने आप दौड़ पड़ती है। राजस्थान के कुंभलगढ़ में जन्में महाराणा प्रताप, महाराणा उदयसिंह और महारानी जयवंती की संतान थे।

महाराणा प्रताप को जितना उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता है, उतनी ही उनकी दरियादिली और प्रजा व राज्य से उनका प्रेम जगजाहिर है। हल्दी घाटी में मुगल शासक अकबर के खिलाफ लड़ा गया उनका युद्ध इतिहास के सबसे चर्चित युद्ध में से है। इस युद्ध में अपनी छोटी सी सेना के साथ, उन्होंने मुगलों की विशाल सेना को नाकों चने चबवा दिए। जंगल में रहकर घास की रोटी खाने का महाराणा प्रताप का किस्सा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।

महाराणा प्रताप के विशेष गुण.. 

महाराणा प्रताप युद्ध के वक्त हमेशा एक भाला अपने साथ रखते थे, जिसका वजन 81 किलो था। वह इस भाले को एक हाथ से नजाते हुए दुश्मन पर टूट पड़ते थे।
#. युद्ध के वक्त महाराणा प्रताप 72 किलो का कवच पहनते थे।
#. इतिहासकारों के अनुसार महाराणा प्रताप के भाले, कवच, ढाल और दो तलवारों का वजन कुल मिलाकर 208 किलोग्राम होता था।
#. महाराणा प्रताप के हथियार इतिहास के सबसे भारी युद्ध हथियारों में शामिल हैं।

#. महाराणा प्रताप ने राजनैतिक वजहों से कुल 11 शादियां की थीं।
#. महाराणा प्रताप के कुल 17 बेटे और 05 बेटियां थीं।
#. महारानी अजाब्दे से पैदा हुए पुत्र अमर सिंह को महाराणा प्रताप का उत्तराधिकारी बनाया गया था।
#. अमर सिंह भी अपने पिता महाराणा प्रताप की तरह काफी बहादुर और पारक्रमी थे।
#. इतिहासकारों के अनुसार हल्दी घाटी युद्ध के वक्त अमर सिंह की आयु 17 वर्ष थी।
#. मेवाड़ की रक्षा करते हुए महाराणा प्रताप की 19 जनवरी 1597 को मृत्यु हुई थी।
#. बताया जाता है कि महाराणा प्रताप की मौत पर मुगल शासक अकबर भी बहुत दुखी हुआ था।
#. अकबर दिल से महाराणा प्रताप के गुणों, उनकी बहादुरी और चरित्र का बहुद बड़ा प्रशंसक था।

#. महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय घोड़े का नाम चेतक था। महाराणा प्रताप की तरह उनका घोड़ा भी बहुत बहादुर और समझदार था।
#. महाराणा प्रताप को बचपन में प्यार से कीका कहकर बुलाया जाता था।
#. महाराणा प्रताप और मुगल शासक अकबर के बीच हल्दी घाटी का विनाशकारी युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। इतिहास में हल्दी घाटी के युद्ध की तुलना महाभारत के युद्ध से की गई है।
#. इतिहासकारों के अनुसार हल्दी घाटी के युद्ध में न तो अकबर की जीत हुई थी और न ही महाराणा प्रताप हारे थे। इसकी वजह महाराणा प्रताप के मन में राज्य की सुरक्षा का अटूट जज्बा था।
#. हल्दी घाटी के युद्ध को टालने के लिए अकबर ने छह बार महाराणा प्रताप के पास अपने शांति दूत भेजे, लेकिन राजपूत राजा ने हर बार अकबर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
#. हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने मात्र 22 हजार सैनिकों के साथ मुगल बादशाह अकबर के 2 लाख सैनिकों का डटकर सामना किया था। बावजूद अकबर महाराणा प्रताप को झुका नहीं सका था।
#. महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय और वफादार घोड़े ने भी दुश्मनों के सामने अद्भुत वीरता का परिचय दिया था। हालांकि इसी युद्ध में घायल होने से उसकी मौत हुई थी।
#. चित्तौड़ की हल्दी घाटी में आज भी महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े चेतक की समाधि मौजूद है।
#. चेतक ने अंतिम दम तक महाराणा प्रताप का साथ दिया। युद्ध में मुगल सेना से घिरने पर चेतक महाराणा प्रताप को बैठाकर कई फील लंबा नाला फांद गया था।
#. महाराणा प्रताप जितने बहादुर थे, उतने ही दरियादिल और न्याय प्रिय भी। एक बार उनके बेटे अमर सिंह ने अकबर के सेनापति रहीम खानखाना और उसके परिवार को बंदी बना लिया था। महाराणा ने उन्हें छुड़वाया था।

महाराणा प्रताप की वीर गाथा को मुगल शासक अकबर का डंटकर सामना करने और अंग्रेजों को धूल चटाने के लिए जाना जाता है।  इतिहास के पन्नों को पलट कर देंखे, तो अकबर और प्रताप दोनों ने बहुत सोच-समझकर ही एक दूसरे के प्रति अपनी नीति निर्धारित की थी।  लिहाज़ा तलवारें टकराने से पहले दोनों ही सुलह करना चाहते थे।  इसके लिए कई बार अकबर ने पहल की, हालांकि प्रताप हमेशा से ही ऐसी दोस्ती के खिलाफ रहे।

इतिहास के मुताबिक अकबर ने 1576 में महाराणा प्रताप से लड़ाई करने का फैसला लिया था।  उस वक्त मुगल शासक के पास 2 लाख सैनिक थे, लेकिन राजपूत सेना में सिर्फ 22 हजार सैनिक ही थे। महाराणा प्रताप, महाराणा उदय सिंह और महारानी जयवंता बाई की पहली संतान थे।  राजमहल में बचपन में उन्हें कीका के नाम से बुलाया जाता था।  भारतीय इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पता चलता है कि महाराणा प्रताप बचपन से ही बहादुर और अपने लक्ष्यों को पाने के लिए जिद्दी थे।  इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाए, तो पता चलता है कि जिस उम्र में बच्चों को खिलौने से खेलने का शौक होता है, उस उम्र में प्रताप हथियार से खेलते थे।

इतिहास की किताबें कहती हैं कि महाराणा प्रताप को धन-दौलत, गहनों से ज्यादा मान-सम्मान की फिक्र थी।  प्रताप ने धन और दौलत को गंवाने में वह कभी पीछे नहीं रहे, लेकिन प्रतिष्ठा के आगे उन्होंने कभी भी घुटने नहीं टेके। 1582 में दिवेर में एक भयानक युद्ध हुआ था।  इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने मुगलों को धूल चटाई थी।  1585 में महाराणा ने चावंड को अपनी राजधानी घोषित किया था।  चित्तौड़गढ़, मांडलपुर को छोड़कर पूरे मेवाड़ पर कब्जा कर लिया था।

 

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