भारत में हर साल सामने आते हैं जलने के 8 लाख मामले : आईएसबीआई

नई दिल्ली: भारत के अस्पतालों में हर साल जलने से जख्मी होने वाले तकरीबन सात-आठ लाख मरीज अस्पतालों में दाखिल होते हैं, लेकिन बर्न केयर की सुविधाओं का अभाव होने कारण सभी मरीजों का सही ढंग से इलाज नहीं हो पाता है। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ बर्न इंजुरीज (आईएसबीआई) की 30 नवंबर से शुरू होने जारी 19वीं कांग्रेस से पूर्व बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन मेंंआईएसबीआई के प्रेसिडेंट डॉ. विलियम जी सियोफ्फी ने कहा, ”हमारे लिए यह खुशी की बात है कि कांग्रेस का आयोजन भारत में किया जा रहा है, जहां, दुनियाभर के विशेषज्ञ भारतीय विशेषज्ञों के साथ अपने अनुभव व जानकारी साझा करेंगे और उनसे भी कुछ सीखेंगे।” इससे पहले, नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम हॉस्पीटल के सीनियर कंसलटेंट और आईएसबीआई के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. राजीव बी. अहूजा ने कहा, ”आईएसबीआई में हमलोग भिन्न-भिन्न देशों में बर्न केयर के अलग-अलग मॉडल को स्वीकार करते हैं।

फिर भी, दुनिया के सभी विकासशील देशों में किफायती उपचार से जुड़ी व्यवस्था पर काम किए जाने की आवश्यकता है।” आईएसबीआई के आकलन के अनुसार, भारत में हर साल सात-आठ लाख मरीज अस्पतालों में दाखिल होते हैं। लेकिन डॉ. अहूजा ने कहा कि इन मरीजों के इलाज के लिए देश के अस्पतालों में जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अहूजा ने कहा कि बर्न इंजुरी यानी जलने के कारण जख्मी हुए मरीजों के लिए समुचित प्रबंध करने के लिए निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच भागीदारी की जरूत है। उन्होंने कहा कि स्कीन बैंक बनाने की आवश्यकता है जो देश के बड़े-बडे़ अस्पतालों में नहीं है। डॉ. अहूजा ने कहा कि इस सम्मेलन में दुनिया के दूसरे देशों के अनुभवों से सीख लेने में मदद मिलेगी।

आयोजक ने बताया कि 30 नवंबर को आईएसबीआई की 19वीं कांग्रेस का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन करेंगे। पांच दिवसीय यह सम्मेलन चार दिसंबर तक चलेगा। सम्मेलन के दौरान ‘बर्न बर्डन ऑफ द वर्ल्ड’ विषय पर एक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें विकासशील देशों में जलने से होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है। आईएसबीआई द्वारा जलने की घटनाओं और उसकी रोकथाम को लेकर मरीजों की देखभाल पर एक दिशा निर्देश जारी किया गया है, जिसके पहले खंड का प्रकाशन अगस्त 2016 में हुआ था। अब इसके दूसरे खंड का प्रकाशित अंक 19वीं अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के दौरान मौजूदा प्रेसिडेंट डॉ. विलियम जी सियोफ्फी द्वारा जारी किया जाएगा।

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