‘मोदी जश्न’ में जनता की कोई भागीदारी नहीं- कांग्रेस

देश में किसान आत्महत्या, युवाओं की नौकरी छिनी है मोदी सरकार

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नयी दिल्ली: कांग्रेस ने आज कहा कि भाजपा सरकार दो हजार करोड रूपये खर्च करके अपने तीन साल का गुणगान करने के लिए जो ‘मोदी जश्न’ मना रही है उसमें देश की जनता की कोई भागीदारी नहीं क्योंकि वह तो ‘जुमलेबाज’, ‘नारेबाज’ और ‘खोखले वादों’ वाली इस सरकार से त्रस्त हो चुकी है।

कांग्रेस महासचिव कमलनाथ ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसका सूत्र वाक्य है, ‘भाषण और आश्वासन, यह है मेरा शासन।’ यह सरकार तीन साल की उपलब्धियों का बखान करने के लिए सिर्फ प्रचार में दो हजार करोड रूपये खर्च कर रही है तथा यह सिर्फ भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का ‘जश्न’ है और इसमें देश का युवा ,किसान ,मजदूर और व्यापारी वर्ग शामिल नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सरकार ने न तो इतना नारा दिया और न ही प्रचार पर इतनी मोटी राशि खर्च की जितनी की मोदी सरकार ने पिछले तीन साल में की है। लेकिन सरकार इन नारों को अमलीजामा नहीं पहना पायी और सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है।

कमलनाथ ने कहा कि देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं, युवाओं की नौकरियां छिन रहीं है, उद्योग धंधे बंद हो रहे है तथा महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और मोदी सरकार अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिए मीडिया प्रचार में बेहिसाब पैसे खर्च कर रही। उन्होंने कहा,’मुझे इस बात पर हैरानी है कि आखिर वे किस बात का जश्न मना रहे हैं। ‘पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘मोदी ब्रांड’ का गुब्बारा जल्द ही फूटेगा और जुमले की राजनीति का पर्दाफाश होगा। देश की जनता को ‘ब्रांड’ नही बल्कि नेता की जरूरत है। ब्रांड की जरूरत कारपोरेट जगत को होती है। मोदी सरकार ने यह समझने की भूल की है कि देश मीडिया मैनेजमेंट से चलता है।

रोजगार पर श्वेत पत्र लाने की मांग करते हुए कमलनाथ ने कहा कि इसमें अगले दो वर्ष में रोजगार के अवसर पैदा करने की रणनीति का ब्यौरा होना चाहिए। मोदी सरकार ने हर वर्ष दो करोड रोजगार देने का वादा किया था लेकिन 2015 में सिर्फ एक लाख 35 हजार रोजगार दिये गये। आई टी सेक्टर में हर वर्ष बीस हजार नौकरियां छिन रही हैं। कृषि क्षेत्र की खस्ताहाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में कृषि दर 4.3 प्रतिशत से कम होकर 1.4 पर आ गयी और कर्ज के बोझ के कारण रोजाना औसतन 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

कमलनाथ ने कहा कि फसल बीमा योजना के नियमों की जटिलताओं के कारण इसका फायदा किसानों की बजाय बीमा कंपनियों को मिला है। कमलनाथ ने कहा कि रिण उठाव 30वर्ष के निम्नतम स्तर 5.3 प्रतिशत पर और घरेलू निवेश ऐतिहासिक निम्न स्तर पर आ गया है। बहुप्रचारित 7.2 प्रतिशत विकास दर से रोजगार और घरेलू संपदा सृजित नहीं हुई जिससे देश को फायदा नहीं हुआ।

व्यापम को देश का सबसे बडा घोटाला करार देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें पैसा देने वाले तो जेल गये लेकिन जिन्होेंने रिश्वत ली उनका कुछ नहीं हुआ। कमलनाथ ने कहा कि नोटबंदी से कितना कालाधन बाहर निकला सरकार के पास इस बात का रिकार्ड नहीं है।

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