लद्दाख का मजा ले सर्दियों में, रहस्यमयी होती है ये यात्रा

लद्दाख जाने के लिए सीधी उड़ानें नहीं हैं। इसके लिए लेह की फ्लाइट लेनी पड़ती है, जिसके बाद बस, टैक्सी आदि से लद्दाख पहुंचा जा सकता है। लेकिन मैंने मुंबई से लेह तक का सफर खुद ड्राइव करके तय किया है। मेरा यह सफर चीन की सीमा पर बसे एक छोटे से गांव पर आकर खत्म हुआ था। चारों ओर फैली खूबसूरती मुझ पर हावी होने लगी थी।

इस तरह लद्दाख मेरे अंदर बसने लगा था। इस पूरे सफर का मेरे व्यक्तित्व पर एक सकारात्मक आध्यात्मिक प्रभाव हुआ था। लेह घूमने पूरी दुनिया से लोग आते हैं। कोई पहाड़ों की खूबसूरती पर किताब लिखता है, तो कोई बौद्ध मतों पर शोध करता है। तो कोई ट्रैवलॉग के जरिए अपनी पहचान बना रहा है। वहां के लोग ज्यादातर नए और शानदार विचारों से भरे हुए थे।

दिन भर सभी लोग अपना समय खूबसूरत दृश्यों को निहारने या ट्रेकिंग में ही गुजारते थे। दिन भर की थकान उतारने और अपनी भूख मिटाने के लिए लोग  रेस्तरां में खाने और सुस्ताने के लिए इकट्ठा होते और आपस में अपने अनुभवों को बांटते थे। लद्दाख में सर्दियों का मौसम खुशनुमा होता है और यही वह समय है, जब लद्दाख मुझे तेजी से अपनी ओर खींचता है। सर्दियों में लद्दाख ज्यादा रहस्यमयी लगता है। इस दौरान मैंने अपनी यात्रा को भरपूर जिया था।

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