सरहुल पूजा के लिए सरना स्थल सज धजकर तैयार

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रांची: एंदेर पूंपन पेलो मेंझेरकी भला भगजोगनी लेखा लवकरकी बरा लगदिन हो,नौर पूंपन पेला मेंझेरकी रे भगजोगनी लेख….., पतेड़ानता पान पंज्जा कोय पेला कूल कीड़न बलेदन बअदिन रे, लुहुर लुहुर उइया कादय भइया, आयो कोढ़ल कु आं,बाबा कोढ़ल कुआं पानी बड़ी मीठा लागय, बन में का फूल फूले गोटा जंगल चरेगा दिसय रे, बन में सरई फूला फूले गोटा बन चरेका दिसय रे …

सहित कई सरहुल गीतों से मोरहाबादी स्थित दीक्षांत समारोह सभागार गुंजायमान रहा। अवसर था सरना नवयुक संघ की ओर से आयोजित सरहुल पूर्व संध्या समारोह का। सरहुल फूल घंटों वातावरण में अपनी महक से सराबोर करता रहा। युवक-युवतियों में सरहुल का उत्साह और उमंग देखते बन रहा था। पारंपरिक लाल पाड़ साड़ी, धोती और वाद्य-यंत्रों के साथ युवा कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए पहुंचे। जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरु लोगों एक उत्साह का संचार हो गया।

संस्कृति से जुड़ते नजर आये युवा
युवा अपनी संस्कृति से जुड़ते नजर आये। खुद गाये और बजाये। अपनी संस्कृति से जो लगाव दिखा, वह काबिले तारीफ योग्य था। आज सभी कहते हैं कि युवा अपनी संस्कृ ति से विमुख हो रहे हैं लेकिन सरहुल पूर्व संध्या समारोह इसे झूठला दिया। गाने के बोल, ताल, लय सब कुछ अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप था।

पारंपरिक वेश-भूषा में आकर्षक लग रही थीं
वेश-भूषा और साज-सज्जा खूब आकर्षक और खूबसूरत था। युवतियां प्रचलन से बाहर हो चुके परिधानों को नृत्य के समय पहनकर दिखाया। जो यह दर्शा रहा था कि अभी उसे भुलाया नहीं गया है। छोटी-छोटी बच्चियां भी बड़ी सज-धजकर आयीं थीं। बाल में सफेद गजरा, हंसुली, बइंहकल, पैंड़ा आदि देखने लायक थे। कोई फैशन से कम नहीं था।
खद्दी तोकना गायब रहा
सरहुल में आदिवासी खास कर उरांव समुदाय के लोग एक विशेष नृत्य करते हैं जिसे खद्दी तोकना कहते हैं। यह नाच सिर्फ सरहुल त्योहार में ही किया जाता है लेकिन सरहुल पूर्व संध्या समारोह में यह नृत्य गायब रहा। कुछ टीमों ने खद्दी नृत्य की तरह एक नाच प्रस्तुत किया लेकिन उसका कहीं से भी खद्दी तोकना से संबंध नजर नहीं आया। ऐसा लग रहा था मानों यह समुदाय अपनी विशेष सरहुल नृत्य खद्दी नाच को भूल सा गया है। मंच में इसकी प्रस्तुति के लिए बहुत से बुजुग इंतजार करते रह गये।

आदिवासी हास्टल के छात्रों की भागीदारी रहती है
सरहुल पूर्व संध्या समारोह आदिवासी कॉलेज हॉस्टल के विद्यार्थियों के कारण सफल होती है। इस समारोह में सिर्फ कॉलेज हॉस्टल के विद्यार्थियों की भागीदारी रहती है। इससे स्पष्ट होता है कि रांची के विभिन्न आदिवासी टोले के लोग अपनी संस्कृ ति भाषा से कटे हुए हैं। प्रस्तुति के लिए कोई गांव-मोहल्ले अपनी टीम के साथ नहीं आते हैं। आदिवासी हास्टल के विद्यार्थी इस समारोह में चार-चांद लगा देते हैं।

आदिवासी ही पर्यावरण के रक्षक हैं : डॉ रमेश कुमार पांडेय
समारोह में कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि आदिवासी ही पर्यावरण की रक्षा का जिम्मेवारी उठाये रखे हैं। यह समुदाय पर्यावरण और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि रांची विश्वविद्यालय रांची में परफॉर्मिंग एंड आर्ट डिपार्टमेंट खोला गया है, जिसमें एमए स्तर की पढ़ाई आर्ट पर की जा सकेगी। रजिस्ट्रार अमर कुमार चौधरी ने कहा कि आदिवासी समाज हजारों वर्ष पहले से शोषित और अत्याचार का शिकार होता आ रहा है। इसके बावजूद इनकी भाषा, संस्कृति और परंपरा अक्षुण्ण है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी खुद क ा आर्थिक मॉडल तय करें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि झारखंड में बाहर से लोग आकर जीविका चला रहे हैं और झारखंड के आदिवासी बाहर पलायन कर रहे हैं। यह दुखद है।

आदिवासियों की जीवन-शैली को ध्यान में रखकर विकास मॉडल तय करें : डॉ करमा उरांव
डॉ करमा उरांव ने कहा कि आदिवासियों को ध्यान में रखकर आर्थिक मॉडल बनाये जायें। आदिवासियों की जीवन-शैली पर्यावरण से जुड़ा है। विकास के ऐसे मॉडल तैयार किये जायें जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। डॉ करमा उरांव ने कहा कि सरकार की नीतियां आदिवासियों को उजाड़ने वाली है। औद्योगिक संस्कृ ति को लागू करने से आदिवासी समाप्त हो जायेंगे। उन्होंने सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन विधेयक, स्थानीय नीति और भूमि जमाबंदी पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताया। प्रोफेसर प्रवीण उरांव ने कहा कि सरहुल के लिए तीन दिनों की राजकीय छुट्टी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी जो पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा में हैं, वे खुद गांव के सरना स्थल की सौंदर्यीकरण के लिए आगे आयें। इससे धर्म के प्रति आस्था जगेगी। उन्होंने कहा कि रांची कॉलेज का नाम झारखंड के महापुरुषों के नाम पर किया जाना चाहिए।

पर्यावरण और शिक्षा से जुड़कर ही विकास : निशा उरांव
इनकम टैक्स विभाग की डिप्टी कमिश्ननर निशा उरांव ने कहा कि आदिवासियों को अपना सरहुल का महत्व नहीं भूलना चाहिए। सरहुल पर्यावरण की रक्षा करने का संदेश देता है। आदिवासियों को संघर्ष और सरना दोनों के लिए एकजुट होना होगा। निशा उरांव ने कहा कि शिक्षा ही विकास का द्वार खोलता है। इसलिए शिक्षा और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ें। अध्यक्ष डॉ हरि उरांव ने कहा कि पूर्व संध्या समारोह से आदिवासी समाज में जागृति आयी है। लोग अपने बारे जानने और लिखने लगे हैं। सचिव महेश भगत ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग प्रकृति पर शोध हजारों वर्ष पहले कर चुके थे। आज आधुनिक विश्व आदिवासियों का अनुसरण कर रहा है। मौके पर पूर्व विधायक बंधु तिर्की, सामाजिक कार्यकर्ता शिवा कच्छप,डॉ यूसी मेहता, डॉ त्रिवेणीनाथ साहू,प्रो महामणि कुमारी, शरण उरांव, महादेव टोप्पो, डॉ विनीता एक्का, डॉ उमेश नंद तिवारी सहित काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

सखुआ परिवार ने चना बांटा
सखुआ परिवार ने सरहुल पूर्व संध्या समारोह मंे आये लोगों के बीच शिविर लगाकर चना, शरबत और पानी का वितरण किया। इस सामाजिक कार्य में राजीवन टाना भगत, अरूण तिग्गा, ब्लासियुस पन्ना, बसंत उरांव, प्रवीण कुमार, राम उरांव, समीर उरांव, निशा भगत आदि ने सहयोग किया।

शशि विनय भगत को प्रथम पुरस्कार
रचना लेखन प्रतियोगिता में शशि विनय भगत को प्रथम, अजीत मुंडा को द्वितीय और प्रदीप बोदरा को तृतीय पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार पूर्व विधायक बंधु तिर्की ओर से लैपटॉप दिया गया।

एकल गीत में सुंदरी कुमारी को प्रथम स्थान::::::::
एकल गीत प्रतियोगिता में सुंदरी कुमारी को प्रथम, सत्यनारायण मुंडा को द्वितीय और बासुदेव हस्सा को तृतीय पुरस्कार दिया गया।

दीपशिखा आदिवासी बालिका छात्रावास को प्रथम स्थान
समूहिक नृत्य में दीपशिखा आदिवासी बालिका छात्रावास को प्रथम, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग कुंडु़ख सामूहिक नृत्य को द्वितीय, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग मुंडारी सामूहिक नृत्य को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

सरहुल पूजा आज तैयारी पूरी ::::::::::::::::::::::
राजधानी रांची में गुरुवार को सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया जायेगा। इसके लिए तैयारी पूरी हो गयी है। सभी सरना स्थलों पर सुबह पूजा होगी। इसके बाद दोपहर भव्य शोभा यात्रा निकाली जायेगी। जिसमें लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे। बुधवार को पहान उपवास रखे। सुबह में केंकड़ा और मछली पकड़ने की रस्म अदा की। शाम को दो नये घड़े में पानी रखा गया। जिसके आधार पर वर्षा के अनुमान की घोषणा की जायेगी।

केंद्रीय समिति ने नौ बजे से पूजा प्रारंभ करने का निर्देश जारी किया
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की के नेतृत्व में सरहुल शोभा यात्रा निकाली जायेगी। इसके लिए उन्होंने सभी सरना स्थलों का भ्रमण किया। विधि-व्यवस्था और अन्य सुविधाओं पर समीक्षा की गयी। समिति की ओर से सभी को निर्देश दिया गया है कि सुबह 9:00 बजे से पूजा प्रारम्भ कर दिया जाये। जल और प्रसाद वितरण के बाद 12 बजे से शोभा यात्रा में शामिल होने के लिए अपने-दल बल के साथ प्रस्थान करें। सरहुल शोभा यात्रा में हमारे सम्मानित विधायक, पूर्व विधायक के साथ साथ पूर्व मुख्यमंत्री माननीय बाबू लाल मरांडी, सुखदेव भगत के साथ अन्य विधायक शामिल होंगे। ऐसे भी प्रत्येक वर्ष शोभा यात्रा में पक्ष-विपक्ष के विधायक/मंत्री भी शामिल होते रहें हैं, जिनका समिति की ओर से सिरमटोली सरना स्थल पर स्वागत एवं अभिन्नदन करती है।
समिति राँची के सभी आम नागरिकों से एवं सभी समुदाय के लोगों से अपील करती है कि सरहुल शोभा यात्रा में शामिल हो और झारखण्ड एकता भाइचारा का अटूट संदेश दें। भ्रमण में नारायण उरांव, चम्पा कुजूर, संदीप तिर्की, संतोष तिर्की, विनोद उरांव, सत्य नारायण लकड़ा, विमल कच्छप, माधो कच्छप, प्रदीप लकड़ा, जयराम किस्पोट्टा, हरि मिंज, सीताराम भगत, रमेश भारती आदि शामिल थे।

शोभा यात्रा के दौरान अपने खोड़हा में बाहरी लोगों को घुसने न दें:::
वहीं केंद्रीय सरना समिति फूलचंद तिर्की गुट ने भी सरहुल शोभा यात्रा को लेकर गाइडलाइन जारी किया। पहानों से नौ बजे पूजा संपन्न करने और 1.30 बजे शोभा यात्रा में शामिल होने, महिलाएं लाल साड़ी, पुरुष धोती, गंजी में, पारंपरिक वाद्य-यंत्र, मांदर,नगाड़ा बजाने, आधुनिक गीत नहीं बजाने, शराब का सेवन न करने, अपने खोड़हा की सुरक्षा खुद करने,अपना खोड़हा में दूसरे लोगों प्रवेश पर रोक लगाने छोटे बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर और पता लिखकर डालने और आपातकाल में केंद्रीय सरना समिति एवं प्रशासन से मदद लेने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया गया।

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