उत्तराखंड में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में घोटाला, 6 पीसीएस अधिकारी निलंबित

उत्तराखंड में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में घोटाला, छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, सीबीआई जांच के आदेश

देहरादून: उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 को फोर लेन बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा मामले में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए गए तत्कालीन छह विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारियों (सभी पीसीएस) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जबकि एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश भी की है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज यहां सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वर्ष 2011 से 2015 के बीच राज्य के ऊधमसिंह नगर जनपद में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 को फोर लेन बनाने के लिए भूमि अधिग्रहित की गई। इसमें संबंधित जनपद के सितारगंज, जसपुर, बाजपुर और काशीपुर तहसील क्षेत्रों में कृषि भूमि को अकृषि की दर्शाकर करोडों रूपए की मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया गया। मामले की जानकारी होने पर विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान, राज्य के मुख्य सचिव ने आयुक्त, कुमायूं मंडल डी.सेंथिल पांडियन को जांच के आदेश दिए थे।

त्रिवेन्द्र ने बताया कि आयुक्त की जांच के अनुसार, अभी तक 18 मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें कृषि भूमि को अकृषि दर्शाकर 240 करोड रूपए के राजस्व की क्षति पहुंचाने का मामला प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि कृषि की भूमि को अकृषि का दर्शाकर उस भूमि का तकरीबन 25 गुना ज्यादा तक मुआवजा प्राप्त कर लिया गया।

उन्होंने बताया कि इस मामले में तहसील, उप खंडीय, चकबंदी आदि विभागों सहित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की संलिप्तता प्रकाश में आई है। इसमें इनके अतिरिक्त लाभार्थयों और के अलावा, अन्य व्यक्तियों के सम्मलित होने की भी संभावना है, इसलिए मामले की जांच सीबीआई से कराने की केन्द्र सरकार से संस्तुति की गई है। उन्होंने बताया कि अब इस मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस द्वारा की जा रही जांच नहीं की जाएगी, बल्कि अभी तक इनके द्वारा की गई जांच रिपोर्ट को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दौरान, जनपद में पीसीएस संवर्ग के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, अनिल कुमार शुक्ला, सुरेन्द्र सिंह जंगपांगी, जगदीश लाल, भगत सिंह फोनिया, एनएस नगन्याल और हिमालय सिंह मर्तोलिया तैनात रहे हैं। इनमें से मर्तोलिया सेवानिवृत्त हो चुके हैं, यह सभी आगे की जांच को प्रभावित नहीं कर सकें और प्रथम दृष्टया जांच में यह दोषी पाए गए हैं, इसलिए इन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया है।

त्रिवेन्द्र ने दोहराया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी और कोई भी व्यक्ति जो दोषी पाया जाएगा, वह चाहें कितना भी प्रभावशाली क्यों नहीं हो, बख्शा नहीं जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जिस समय अवधि में यह घोटाला हुआ तब राज्य में कांग्रेस की सरकार सत्तारूढ थी।
इस दौरान, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, मुख्य सचिव एस रामास्वामी, आयुक्त कुमायूं डी.सेंथिल पांडियन और आयुक्त गढवाल विनोद शर्मा भी मौजूद थे।

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