धारा-370 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया नोटिस

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर को धारा-370 के तहत विशेष दर्जा देने को चुनौती देनेवाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में धारा 370 को अस्थायी घोषित करने की मांग की गई है।बतादें कि को धारा-370 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तीन और याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

पिछले 17 जुलाई को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख रखने से बचने की कोशिश की थी। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि इस मसले पर केंद्र कोई हलफनामा नहीं देना चाहती है।

दो सदस्यीय चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मसले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय बेंच को रेफर कर दिया।सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि ये मामला बहुत संवेदनशील है और इस पर बड़ी बहस होनी चाहिए। इसमें संवैधानिक मसले जुड़े हुए हैं, इसलिए इसे बड़ी बेंच को सुनवाई के लिए रेफर कर दिया जाना चाहिए। जिसके बाद कोर्ट ने तीन जजों की बेंच को सुनवाई के लिए रेफर कर दिया।

दिल्ली की एक एनजीओ वी द सिटिजंस ने एक जनहित याचिका दायर कर धारा 35ए को असंवैधानिक करार देने की मांग की है। ये कानून राज्य के मूल निवासियों को छोड़कर सभी भारतीयों को अचल संपत्ति खरीदने, राज्य सरकार की नौकरी पाने और राज्य में बसने से रोकता है। याचिका में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर सरकार धारा 35ए और धारा 370 की आड़ में दूसरे राज्यों के लोगों को जमीन खरीदने से रोकती है।

इस मामले में जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार ने अपने हलफनामा में इन धाराओं का समर्थन किया है। हलफनामा में कहा गया है कि धारा 35ए भारतीय संविधान की एक स्थायी व्यवस्था है। भारत के राष्ट्रपति ने 1954 में अपने आदेश में इसकी पुष्टि की है। इसलिए इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है।

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