मोदी ने सांप्रदायिकता, आतंकवाद भारत छोड़ो का नारा दिया

नई दिल्ली: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से एक बार फिर देश से गंदगी, गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से यह संकल्प लेने के लिए कहा कि वे 2022 तक इन सभी चीजों को भारत से बाहर भगा देंगे। मोदी ने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन के 75वें साल के अवसर पर महात्मा गांधी को सराहनापूर्वक याद करते हुए कहा कि गंदगी, गरीबी और भ्रष्टाचार रहित ‘न्यू इंडिया’ (नया भारत) के निर्माण के लिए लोगों के लिए अगले पांच साल निर्णायक साबित हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”जिस तरह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आखिरी पांच वर्ष (1942 से 1947) बेहद निर्णायक रहे, 2017 के बाद आने वाला पांच साल भारत का भविष्य तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है। आज से पांच साल बाद हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे होंगे।” मोदी ने कहा, ”हमें 2017 को संकल्प का वर्ष बनाना होगा। आने वाले अगस्त के महीने में हम साथ मिलकर संकल्प लेंगे – गंदगी, भारत छोड़ो, गरीबी भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार भारत छोड़ो, आतंकवाद भारत छोड़ो, जातिवाद भारत छोड़ो, सांप्रदायिकता भारत छोड़ो।” उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन के दौरान ‘करो या मरो’ का नारा दिया था, लेकिन आज, हमें अपने देश के लिए मरने की नहीं, बल्कि जीवित रहने और इसे प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर नौ अगस्त को हम ‘संकल्प से सिद्धि’ की शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री ने 30 जून की आधी रात से देशभर में लागू की गई कर प्रणाली जीएसटी की सराहना करते हुए कहा कि यह मात्र कर सुधार भर नहीं है, बल्कि ‘ईमानदारी की नई संस्कृति’ है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें देशवासियों की चिट्ठी मिलती है और देश का एक गरीब व्यक्ति जब यह लिखता है कि कैसे जीएसटी के कारण उसकी दैनिक जरूरत की चीजें सस्ती हो गईं, तो इससे उन्हें बेहद खुशी और संतुष्टि मिलती है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”जीएसटी भारतवासियों की समग्र शक्ति का बेहतरीन उदाहरण है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। और यह सिर्फ कर सुधार भर नहीं है, बल्कि एक नई अर्थव्यवस्था है, जो ईमानदारी की नई संस्कृति को समृद्ध करेगा।”  मोदी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की भी सराहना की। मोदी ने कहा कि भले ही महिला टीम विश्व कप फाइनल में हारी हो, लेकिन उसने देशवासियों का दिल जीत लिया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि विश्व कप की समाप्ति के बाद, जब वो महिला खिलाड़ियों से मिले, तो उन्होंने कहा था कि वे अपने दिमाग से असफल होने की बात निकाल दें। भले ही आपने मैच जीता हो या नहीं, आपने निश्चित तौर पर देशवासियों का दिल जीत लिया।

मोदी ने कहा, ”मैं उनके चेहरे पर तनाव देख सकता था। मैंने कहा, देखिए, यह मीडिया का युग है। इस कारण उम्मीदें इस स्तर पर पहुंच गई हैं कि अगर कोई पहले से तय सफलता हासिल नहीं करता है, तो यह निराशा यहां तक कि असंतोष में तब्दील हो जाती है।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”यह पहली बार हुआ है कि हमारी बेटियां भले ही विश्व कप जीतने में सफल न रही हों, लेकिन 125 करोड़ भारतीयों ने इस हार के भार को बेटियों के कंधों पर रखने के बजाए अपने कंधों पर ले लिया।”

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