नोटबंदी के बाद देश में आये बदलावों पर शोध हो आईआईएम में: जावड़ेकर

नयी दिल्ली: मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) को नोटबंदी के बाद देश में आये बदलावों के बारे में सर्वेक्षण और शोध कार्य करना चाहिए ताकि यह पता चले कि देश किस तरह बदल रहा है।

जावड़ेकर ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भारतीय प्रबंधन संस्थान तिरुचिरापल्ली के स्थाई परिसर का उद्घाटन करते हुए यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी और उसके बाद देश में लोगों के जीवन और व्यवहार में भी बदलाव आया है और इसका प्रभाव चुनाव में भी दिखाई पड़ा है। लोगों ने धर्म जाति से परे होकर मतदान किया। इस तरह देश बदल रहा है और लोकतंत्र में भी परिवर्तन आया है।

उन्होंने कहा कि आईआईएम को इस पर शोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह संसद में सभी आईआईएम को राष्ट्रीय संस्थान का दर्जा दिए जाने के बारे में एक विधेयक लाया जायेगा। इस विधेयक के पारित होने से ये आईआईएम डिग्री प्रदान कर सकेंगे और स्नात्तकोत्तर पढ़ाई भी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इससे आईआईएम को पूरी स्वायत्ता मिलेगी और वे अपनी पंचवर्षीय योजनाएं स्वयं बनायेंगे।

उन्होंने कहा कि आईआईएम को सरकार आम आदमी के टैक्स से प्राप्त धन देती है इसलिए आईआईएम से पास करने वाले छात्रों को पढ़ाई के बाद गरीब लोगों का ख्याल रखना चाहिए। इसके अलावा अपने अभिभावकों का भी ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस आईआईएम के परिसर के लिए 772 में से 394 करोड़ रुपए दिए हैं। इस संस्थान के निदेशक प्रफुल्ल अग्निहोत्री ने कहा कि 170 एकड़ में फैले इस परिसर में छह हॉस्टल और शिक्षकों के लिए घर के अलावा स्वीमिंग पूल और वाई फाई की सुविधा भी होगी।

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