ईडी ने वीरभद्र सिंह का 27.29 करोड़ रुपये का फॉर्महाउस किया कुर्क

ईडी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का 27.29 करोड़ रुपये का फॉर्महाउस कुर्क कर लिया

नयी दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन मामले में यहां हिमाचल प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह का 27.29 करोड़ रुपये का फॉर्महाउस कुर्क कर लिया। एजेंसी ने कुर्की का यह कदम धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उठाया है। फॉर्महाउस दक्षिणी दिल्ली के महरौली के निकट डेरा मंडी गांव में स्थित है।

ईडी के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, ”फॉर्महाउस की खरीद कीमत 6.61 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी बाजार कीमत 27 करोड़ रुपये है। वीरभद्र सिंह ने अपने काले धन से ‘मेपल डेस्टिनेशंस एंड ड्रीमबिल्ड’ कंपनी के नाम से फॉर्महाउस खरीदा। इस कंपनी में उनके बेटे विक्रमादित्य (बड़े शेयरधारक) तथा बेटी अपराजिता (छोटे शेयरधारक) निदेशक हैं।” फॉर्महाउस की रजिस्ट्री कराने में 1.20 करोड़ रुपये खर्च हुए। भुगतान 15 लाख रुपये व 45 लाख रुपये के चेक एवं बाकी के 5.41 करोड़ रुपये नकद में दिए गए। उन्होंने कहा कि यह फॉर्महाउस फर्जी कंपनियों द्वारा फंडिंग के माध्यम से खरीदा गया और मामले में यह दूसरी कुर्की है।

जांचकर्ताओं ने पाया है कि फॉर्महाउस खरीदने के लिए धनराशि की व्यवस्था वकमुल्ला चंद्रशेखर ने की, जो तारिनी ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रोमोटर तथा निदेशक हैं और पनबिजली परियोजनाओं का काम करते हैं।
अधिकारी ने कहा, ”संयोगवश, चंद्रशेखर की कंपनी को हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में साइकोठी संयंत्र के निर्माण का ठेका दिया गया है। फॉर्महाउस खरीदने के लिए पैसे चंद्रशेखर के दिल्ली स्थित करूर वैश्य, कोटक महिंद्रा तथा आईसीआईसीआई बैंक के व्यक्तिगत बैंक खाते से दिए गए। उन्होंने सिंह परिवार को कुल 5.9 करोड़ रुपये की राशि दी।” प्रवर्तन निदेशालय का यह कदम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा सिंह तथा अन्य के खिलाफ कथित तौर पर अवैध रूप से 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने को लेकर आरोप-पत्र दाखिल किए जाने के बाद उठाया गया है।

सीबीआई द्वारा वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा, जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के एजेंट आनंद चौहान तथा उनके सहयोगी चुन्नी लाल व अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ 23 सितंबर, 2015 को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत वीरभद्र सिंह तथा अन्य के खिलाफ 2015 में एक आपराधिक मामला दर्ज किया था।

प्राथमिक जांच में पाया गया कि साल 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह ने कथित तौर पर 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी। इसके बाद सीएम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

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