हंगामे के बीच 3 तलाक विधेयक राज्यसभा में पेश, विपक्ष इसे प्रवर समिति को भेजने पर अड़ा

नयी दिल्ली: राज्यसभा में आज जबरदस्त हंगामे के बीच तीन तलाक से संबंधित विधेयक पेश कर दिया गया लेकिन विपक्षी सदस्य इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग पर अड़ गये जिसके कारण सदन में अव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

महाराष्ट्र के पुणे में जातीय हिंसा के मुद्दे पर तीन बार स्थगन के बाद जब तीन बजे कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग को लेकर फिर से जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच उप सभापति पी जे कुरियन ने विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद को तीन तलाक से संबंधित विधेयक सदन में पेश करने को कहा। इस पर विपक्षी सदस्यों ने गहरी आपत्ति व्यक्त की और वे सरकार को दलित विरोधी बताते हुए हंगामा करने लगे।

श्री प्रसाद का कहना था कि विपक्ष ने तीन तलाक विधेयक का लोकसभा में तो समर्थन किया है लेकिन वह इसे राज्यसभा में पारित नहीं कराना चाहता इसीलिए वह हंगामा कर रहा है और दलितों का मुद्दा जानबूझकर उठा रहा है। इस पर सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि विपक्ष इस विधेयक के समर्थन में है लेकिन वह इसे विधायी प्रक्रियाओं के तहत पारित कराना चाहता है ताकि इसमें कोई खामी न रहे।

इस बीच सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने नियम 70 (2ए) के तहत इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा और इसके लिए विपक्षी सदस्यों के नामों का भी प्रस्ताव किया जिनमें कांग्रेस के विवेक तन्खा, रेणुका चौधरी , के रहमान खान , तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन , बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, एनसीपी के माजिद मेनन , सपा के जावेद अली खान, माकपा के के के रागेश , भाकपा के डी राजा , राजद की मीसा भारती , झामुमो के संजीव कुमार , आईयूएमएल के पी वी अब्दुल वहाब , बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य , द्रमुक के तिरूचि शिवा, तेदेपा के सी एम रमेश, अन्ना द्रमुक के नवनीत कृष्णन और मनोनीत के टी एस तुलसी के नाम शामिल थे।

इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दू शेखर राय ने भी नियम 125 के तहत विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजे जाने का प्रस्ताव रखा । सदन के नेता अरूण जेटली ने श्री शर्मा के प्रस्ताव को यह कहते हुए गैर कानूनी बताया कि कोई सदस्य नियम 70 (2ए) के तहत केवल उस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव कर सकता है जो पहले राज्यसभा में पेश किया गया हो। चूंकि यह विधेयक पहले लोकसभा में पेश किया गया था इसीलिए यह नियम इस मामले में लागू नहीं होता। उनका यह भी कहना था कि इस नियम के तहत यदि कोई सदस्य प्रस्ताव पेश करना चाहता है तो उसे 24 घंटे पहले सभापति को सूचना देनी होती है और उनकी अनुमति लेनी होती है लेकिन श्री शर्मा ने आज ही इस प्रस्ताव को रखा तथा इसकी मंजूरी नहीं ली।

श्री जेटली ने कहा कि श्री शर्मा ने प्रवर समिति के सभी सदस्यों के नाम अपने आप सुझा दिये हैं और उसमें सत्ता पक्ष के सदस्यों को शामिल नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस समिति में एक खास ‘राजनीतिक समूह’ का ही नाम रखा गया है और सदन को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। इस पर श्री शर्मा ने कहा कि कल सभापति के कक्ष में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में उन्होंने बता दिया था कि वह इस प्रस्ताव को सदन में पेश करेंगे और सभापति ने हमें इसकी अनुमति भी दी थी। श्री शर्मा का यह भी कहना था कि उन्होंने प्रस्ताव पेश करते समय यह स्पष्ट रूप से कहा है कि सत्ता पक्ष भी प्रवर समिति के लिए अपने नाम भेजे इसलिए यह कहना गलत है कि सत्ता पक्ष के लोगों का नाम शामिल नहीं किया गया है।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के डेरेन ओ ब्रायन ने कहा कि नियम 125 के तहत जो प्रस्ताव पेश किया गया है वह पूरी तरह वैध है इसलिए इस पर अपनी ओर से व्यवस्था दें। श्री शर्मा ने भी इन प्रस्तावों पर व्यवस्था की मांग की लेकिन सत्ता पक्ष इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने के पक्ष में नहीं था और उसके सदस्य बार बार यह कह रहे थे कि विपक्ष मुस्लिम महिलाओं का विरोधी है और इस विधेयक को पारित नहीं कराना चाहता। इस पर श्री आजाद और सपा के नरेश अग्रवाल का कहना था कि वे विधेयक के समर्थन में हैं लेकिन इसके विस्तृत अध्ययन के लिए इसे प्रवर समिति के पास भेजे जाने के पक्ष में हैं।

सभा पक्ष के शोर शराबे के बीच श्री ब्रायन , श्री शर्मा और श्री आजाद ने इस प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग शुरू कर दी तब श्री कुरियन ने कहा कि सदन में जब इतनी भारी अव्यवस्था है तो वह मतविभाजन कैसे करा सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर सत्ता तथा विपक्ष के बीच तीखी नोक झोक होती रही है और दोनों एक दूसरे पर राजनीति करने का आरोप भी लगाते रहे । सदन में भारी अव्यवस्था को देखते हुए श्री कुरियन ने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

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