‘समावेशी वृद्धि सूचकांक’ में भारत पाकिस्तान से भी नीचे

नयी दिल्ली: सरकार के विकास के तमाम दावों के बावजूद ‘समावेशी वृद्धि सूचकांक’ में भारत पाकिस्तान से भी पीछे है। स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में आयोजित होने जा रहे विश्व आर्थिक मंच के शिखर सम्मेलन के अवसर पर उसकी ओर से जारी ‘ समावेशी वृद्धि सूचकांक’ की सालाना रिपोर्ट में उभरती अर्थव्यस्थाओं वाले देशों की सूची में भारत को पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों से भी नीचे 62 वें स्थान पर रखा गया है।

इसमें चीन 26 वें और पाकिस्तान 47 वें स्थान पर जबकि लिथुआनिया जैसा छोटा सा देश शीर्ष पर है। दूसरी और आर्थिक रूप से विकसित देशों की श्रेणी में नार्वे पहले नंबर पर है। 103 देशों के इस सूचकांक पर किसी भी देश का स्थान वहां के लोगों के रहन – सहन के स्तर , पर्यावरण की स्थिति तथा भावी पीढियों पर कर्ज के बोझ के आधार पर तय किया जाता है। इसमें देशों को दो वर्गों में विभाजित किया गया है पहला समूह आर्थिक रूप से विकसित 29 देशों का है जबकि दूसरे समूह में उभरती अर्थव्यवस्था वाले 74 देश शामिल हैं।

हालांकि आर्थिक मंच ने सदस्य देशों से अनुरोध किया हेै कि वह समग्र विकास को आंकने के लिए कोई नया मॉडल इजाद करे और आर्थिक उपलब्धिया आंकने के लिए जीडीपी के आंकडों पर निर्भरता कम करें क्योंकि इससे अल्पावधि में असमानता की स्थिति पैदा हो रही है। सूचकांक में 62 वें पायदान पर रहने के बावजूद उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह में भारत दस ऐसे शीर्ष देशों में शामिल है जिनकी अर्थव्यवस्था काफी तेज गति से बढ़ रही है। विश्व आर्थिक मंच का मानना है कि अमीर और गरीब दोनों ही तरह के देश अपनी भावी पीढ़ियों को एक बेहतर भविष्य देने के लिए समान रूप से जूझ रहे हैं।

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