वित्त विधेयक में 7 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कराधान कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव : सीतारमण

नई दिल्ली: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि वित्त (संख्या-2) विधेयक-2019 में ‘मेक इन इंडिया’ के परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सात प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कराधान कानूनों में संशोधन के प्रस्तावों को शामिल किया गया है। लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि वित्त विधेयक के जरिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) समेत पांच प्रमुख श्रेणियों में कानूनों में सशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है। वित्तमंत्री ने कहा, ”विधेयक में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न कराधान प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। मेक इन इंडिया को ध्यान में रखते हुए प्रत्यक्ष कराधान के तहत करीब सात अधिनियमों में संशोधन किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्यक्ष कराधान के तहत कई कदम उठा रही है।

सीतारमण ने कहा कि सात प्रत्यक्ष काराधान कानूनों में भुगतान एवं समाधान प्रणाली कानून, काला धन कानून, आयकर कानून, वित्तीय कानून 2015, वित्तीय कानून 2004 और बेनामी कानून को शामिल किया गया जिनमें विधेयक के जरिए संशोधन किया जा रहा है। प्रत्यक्ष कराधान में इन संशोधनों का मकसद कॉरपोरेट कर की दर में कटौती करना, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना, स्टार्टअप्स, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र और कुछ गैर-बैंकिंग कंपनियों को प्रोत्साहन प्रदान करने के साथ-साथ काला धन पर लगाम लगाने के सरकार के एजेंडा को आगे बढ़ाना है। इसके अलावा, बैंक से निकासी पर टीडीएस लगाने, रिटर्न दाखिल करने को अनिवार्य बनाने, पैन और आधार का जिक्र करने व अन्य प्रस्तावों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अप्रत्यक्ष कर के तहत सात कानूनों में संशोधन किया जा रहा है ताकि अप्रत्यक्ष कर से संबंधित विषयों को सरल व प्रभावी बनाया जाए।

अप्रत्यक्ष कराधान कानूनों में सीमाशुल्क कानून, शुल्क कानून, जीएसटी कानून, वित्तीय कानून 2002, वित्तीय कानून 2018 व अन्य शामिल हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि सिर्फ जीएसटी में पांच अलग-अलग संशोधन किए गए हैं जिससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर में अनुपालन सरल बनेगा और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा, ”पीएमएलए (धनशोधन निवारण कानून) में भी संशोधन का प्रस्ताव है।” सीतारमण के अनुसार, सेबी कानून समेत वित्तीय बाजार से संबंधित आठ कानूनों में संशोधन किया जा रहा है। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) सदस्य एन. के. प्रेमचंद्रन ने बेनामी कानून, सेबी कानून और पीएमएलए समेत कई कानूनों में संशोधन के प्रावधानों वाले वित्त विधेयक पर आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक में सिर्फ कराधान के प्रस्ताव हो सकते हैं।

 

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