मक्का उगा कर क्यों मौज कर रहे देश के किसान

नई दिल्ली: मक्का इस साल देश के किसानों के लिए लाभकारी फसल साबित हुई है। देश में मक्का सहित अन्य मोटे अनाजों के उत्पादन में कमी आने और पशुचारा बनाने वाली कंपनियों की ओर से मक्के की मांग तेज होने के कारण कीमतों में पिछले साल के मुकाबले दोगुना इजाफा हुआ है। लिहाजा, देश के किसान इस बार मक्के की फसल उगाकर मौज कर रहे हैं। देश में मक्के की प्रमुख मंडी बिहार स्थित गुलाब बाग अनाज मंडी में इन दिनों अच्छी क्वालिटी के मक्के का दाम 2,100-2,150 रुपये प्रति कुंटल चल रहा है, जोकि पिछले साल सीजन की शुरुआत में 1,100 रुपये प्रति कुंटल था। यही, नहीं किसानों को इस बार सरकार द्वारा निर्धारित मक्के के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुकाबले भी ज्यादा दाम मिला है।

केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2017-18 में मक्के का एमएसपी 1,425 रुपये प्रति कुंटल तय किया था, जिसे 2018-19 में बढ़ाकर 1,700 रुपये प्रति कुंटल कर दिया गया। चालू फसल वर्ष 2019-20 के खरीफ सीजन के मक्के के लिए सरकार ने एमएसपी 1,760 रुपये प्रति कुंटल तय किया है। जींस कारोबारियों ने बताया कि पशुचारे में प्राय: मक्का, जौ व अन्य मोटे अनाज का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इस साल मोटे अनाज का उत्पादन कम होने के कारण दाम ऊंचा है। गुलाब बाग मंडी के सिकंदर चौरसिया ने बताया कि इस साल दाम ऊंचा रहने के कारण स्टॉकिस्ट मक्के का स्टॉक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस साल दूसरे प्रदेशों की मांग ज्यादा है।

गौरतलब है कि रबी सीजन में मक्के की फसल सबसे ज्यादा बिहार में उगाई जाती है, इसलिए पंजाब हरियाणा सहित संपूर्ण उत्तर भारत और गुजरात में बिहार से मक्के की आपूर्ति की जाती है। राजस्थान के जींस कारोबारी उत्तम जेठवानी ने बताया कि इस बार मक्का ही नहीं जौ व अन्य मोटे अनाजों के दाम काफी ऊंचे चल रहे हैं, इसलिए शुरुआत में पशुचारा बनाने वाली कंपनियां सस्ते दर पर गेहूं खरीद रही थीं, जिससे गेहूं के दाम को भी सपोर्ट मिला। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जून में जारी तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) में देश में मक्के का उत्पादन 278.2 लाख टन है, जबकि पिछले फसल वर्ष 2017-18 में मक्के का उत्पादन 287.5 लाख टन था।

तीसरे अग्रिम उत्पदन अनुमान के अनुसार, जौ का उत्पादन पिछले साल जहां 17.8 लाख टन था, वहीं 2018-19 में 17.3 लाख टन है। मोटे अनाजों का उत्पादन पिछले फसल वर्ष के 469.7 लाख टन के मुकाबले 2018-19 में घट कर 433.3 लाख टन रह गया। मक्के का लाभकारी मूल्य मिलने के कारण चालू खरीफ सीजन में किसानों ने मक्के की फसल लगाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से बीते शुक्रवार जारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर के किसानों ने अब तक इस साल 63.84 लाख हेक्टेयर में मक्के की फसल लगाई है, जबकि पिछले साल मक्के की बुवाई अब तक 62.48 लाख हेक्टेयर में हुई थी। इस प्रकार मक्के का रकबा 1.36 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है।

बिहार के बेगुसराय स्थित आईसीएआर-आईआईएमआर के क्षेत्रीय मक्का अनुसंधान व बीज उत्पादन केंद्र के प्रभारी व प्रधान वैज्ञानिक श्याम वीर सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मक्के की फसल लगाने में किसानों की दिलचस्पी का कारण लाभकारी दाम मिलना तो है, इसके साथ-साथ इसमें पानी की भी कम जरूरत होती है और इसकी उत्पादकता गेहूं, धान सहित अन्य अनाजों से ज्यादा होती है। उन्होेंने बताया कि धान के मुकाबले मक्के की फसल में 60 फीसदी कम पानी की जरूरत होती है।

सिंह ने बताया कि मक्के की फसल खरीफ सीजन में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में भी लगाई जाती है, लेकिन रबी सीजन में मक्के की फसल बिहार में ज्यादा उगाई जाती है। इसके बाद राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य प्रदेशों में भी अब रबी की फसल किसान लगाने लगे हैं। सिंह ने बताया कि कुछ हाइब्रिड मक्के की पैदावार 80-100 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक होने लगी है। देश में मक्के की आपूर्ति इस साल कम होने के कारण पशुचारा विनिर्माताओं की मांग पर सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के तहत चालू वित्त वर्ष में एक लाख टन मक्के के आयात को मंजूरी प्रदान की है।

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