गिफ्ट

गिफ्ट

एक सन्यासी राजा के पास गया | राजा ने उसका बहुत आदर सत्कार किया | कुछ दिन ठहरने के बाद विदा लेते समय सन्यासी ने राजा से उनकी अपनी पसंद का कोई गिफ्ट देने को कहा | राजा ने कुछ देर सोचा, फिर बोला –

“खजाने में जो कुछ है ले लीजिये |” इसपर सन्यासी ने कहा –

“यह तो आपका है ही नहीं, यह तो राज्य का है, आप तो केवल उसके संरक्षक हैं |”

“तो आप यह राजमहल ले लीजिये |” राजा ने कहा | इसपर सन्यासी हँसते हुए बोला –

“यह भी तो जनता का ही है |” तब राजा ने कहा –

“यह मेरा शरीर अवश्य मेरा अपना है, आप इसे ले सकते हैं और किसी भी रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं |” इसपर सन्यासी ने उत्तर देते हुए कहा –

“यह तो आपके बच्चों का है, इसे मैं कैसे ले सकता हूँ ?”

“तो फिर मेरे पास क्या है, जो मेरा है और जिसे मैं आपको दे सकता हूँ | हे प्रभु, कृपया मुझे वह चीज बताइये, जिसे मैं आपको दे सकूँ |”

“हे राजन, यदि आप सचमुच अपनी कोई वस्तु जो वास्तव में आपकी अपनी है, देना चाहते हैं तो आप मुझे अपना अहँकार, अपना घमंड दीजिये, क्योंकि यह आपकी हार का कारण बन सकता है |” 

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