चीन-भारत दोस्ती पर चीन का बड़ा बयान- हम 1 और एक दो नहीं, 11 हैं: चीन

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 8 मार्च को पेइचिंग में आयोजित 13वीं एनपीसी के पहले पूर्णाधिवेशन का संवाददाता सम्मेलन बुलाया। इस दौरान उन्होंने चीन-भारत संबंधों से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

भारतीय पीटीआई संवाददाता द्वारा यह पूछे जाने पर कि सिलसिलेवार मुद्दों पर मतभेद और डोकलाम विवाद की वजह से साल 2017 में चीन-भारत संबंध मुश्किल वक्त से गुजरे। इस वर्ष के शुरु में और गत वर्ष के अंत में चीनी स्टेट काउंसलर यांग च्येछी और आप ने क्रमशः भारत की यात्रा की। वहीं भारतीय विदेश सचिव ने चीन का दौरा किया। इस वर्ष चीन द्विपक्षीय संबंधों का कैसा विकास करेगा?

अपने जवाब में वांग यी ने कहा कि चीन-भारत संबंधों के विकास का रुझान बरकरार रहा है, जिस दौरान मुसीबत और परीक्षा भी मौजूद थी। चीन अपने उचित अधिकार और हितों का दृढ़ता के साथ रक्षा करने के साथ-साथ चीन-भारत संबंधों की समग्र स्थिति को भी सक्रिय रूप से देखता है। चीन-भारत संबंधों के विकास के भविष्य के बारे में दोनों देशों के नेताओं ने महत्वपूर्ण रणनीतिक आम सहमतियां प्राप्त कीं। यानी कि चीन और भारत को प्रतिस्पर्द्धा के बजाए सहयोग करना चाहिए। चीन भारत एक प्लस एक का परिणाम दो नहीं है, बल्कि 11 है।

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्थिति परिवर्तित हो रही है। अधिक से अधिक प्रतिभाओं के विचार में एक अरब से अधिक जनसंख्या वाले दो महा विकासशील देश आधुनिकीकरण की ओर आगे बढ़ रहे हैं। आपसी समझ और एक दूसरे का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों देशों को आपसी संदेह और परस्पर नुकसान से बचना चाहिए। इस दृष्टि से देखा जाए, तो चीन और भारत के बीच आपसी विश्वास वाले सवाल का समाधान किया जाना फौरी बात है। राजनीतिक आपसी विश्वास की स्थापना के बाद हिमालय पर्वत भी दोनों पक्षों के बीच मित्रवत आवाजाही को नहीं रोक सकता।

आपसी विश्वास के अभाव से समतल मैदान में दोनों पक्षों का मिलन भी नहीं हो पाता। मैं यहां भारतीय मित्र को बताना चाहता हूँ कि चीन और भारत के बीच मतभेदों की तुलना में सहमतियां कहीं अधिक हैं, विवाद से हित कहीं ज्यादा है। चीन भारत के साथ मिलकर मित्रवत परंपरा को जारी रखते हुए भारतीय जनता के साथ दोस्त और साझेदार बनना चाहता है। आशा है कि दोनों देश हृदय की गांठ खोलकर एक ही दिशा की ओर आगे बढ़ेंगे। और संदेह के बजाय विश्वास को बढ़ावा देंगे, संवाद से मतभेदों का प्रबंधन और नियंत्रण करेंगे और सहयोग से भविष्य की रचना करेंगे।

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