अमेरिकी ड्रोन हमले में टीटीपी सरगना फजलुल्ला ढेर

वाशिंगटन: अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में अमेरिकी ड्रोन हमले में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का प्रमुख मुल्ला फजलुल्ला मारा गया। उस पर स्वात घाटी में अपने संगठन के अभियान को उस समय संचालित करने का अरोप है, जब 2012 में पाकिस्तानी कार्यकर्ता मलाला युसुफजई को गोली मारी गई थी। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद रादमनिश ने सीएनएन को बताया कि 2013 में टीटीपी की कमान संभालने वाला फजलुल्ला बुधवार को कुनार प्रांत में हमले में मारा गया।इससे पहले, अमेरिकी सुरक्षाबल-अफगानिस्तान के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ओ’डोनेल ने वॉइस ऑफ अमेरिका को बताया कि अमेरिकी बलों ने अफगानिस्तान व पाकिस्तान की सीमा के पास कुनार प्रांत में 13 जून को आतंकवाद-रोधी हमले किए, जिसका निशाना एक प्रमुख आतंकवादी संगठन का सरगना बना।

स्थानीय लोगों ने भी उसकी मौत की पुष्टि की है। हालांकि, पेंटागन के अधिकारियों ने इस मामले में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि 2013 में संगठन का प्रमुख बनने के बाद से फजलुल्ला ने अमेरिकी और पाकिस्तानियों को निशाना बनाते हुए कई हाई-प्रोफाइल हमलों को अंजाम दिया, जिसमें दिसंबर 2014 में पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुआ हमला भी शामिल है, जिसमें 151 लोग मारे गए थे।

उस पर 2012 में आदेश देकर मलाला युसुफजई की हत्या की हत्या कराने का प्रयास करने का भी आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मार्च में फजलुल्ला पर 50 लाख डॉलर का इनाम रखा था, उसी महीने पाकिस्तानी सूत्रों ने कहा था कि टीटीपी प्रशिक्षण ठिकाने पर अमेरिकी ड्रोन हमले में उसका बेटा मारा गया। राष्ट्रपति अशरफ गनी द्वारा ऐलान किया गया, ”अमेरिकी सेना-अफगानिस्तान और नाटो के नेतृत्व वाली साहसी सहायक बलों ने अफगान तालिबान के साथ अफगानिस्तान सरकार के एकतरफा युद्धविराम का पालन करना जारी रखा है।” बयान में आगे कहा गया, ”जैसा पहले ही कहा जा चुका है, संघर्षविराम में क्षेत्रीय और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अमेरिका का आतंकवाद-रोधी प्रयास शामिल नहीं है।” इसमें कहा गया, ”हमें आशा है कि यह विराम सुलह कराने और शत्रुता खत्म करने के लिए बातचीत और प्रगति की ओर अग्रसर होगा।”

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