हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और आलोचना के खर पुरुष नामवर सिंह को जाने…

नई दिल्ली: कविता के रचनाकार, हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और आलोचना के खर पुरुष नामवर सिंह  का मंगलवार की मध्य रात्रि निधन हो गया, वह 92 वर्ष के थे, उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर करीब 3 बजे लोधी रोड शव गृह में किया जाएगा।

पिछले एक माह से बीमार थे नामवर सिंह

आलोचना के रचना पुरुष कहे जाने वाले नामवर सिंह पिछले एक माह से बीमार थे और वे दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती थे, यहां उन्‍होंने बीती रात 11 बजकर 15 मिनट पर अंतिम सांस ली। प्राप्‍त हुई जानकारी के अनुसार, यह बताया गया है कि, गत जनवरी माह में वे अचानक अपने रुम में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां के डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था, हालांकि उनके इलाज में कुछ सुधार भी हुआ था, लेकिन वे पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पाए थे।

कौन थे नामवर सिंह?

डॉ. नामवर सिंह का जन्म 1 मई ( या 28 जुलाई) 1927 को वाराणसी जिले के जीयनपुर नामक गाँव में हुआ । काशी विश्वविद्यालय से उन्होने हिन्दी में एम.ए.और पी.एच डी . की । 82 वर्ष की उम्र पूर्ण कर चुके नामवरजी विगत 65 से भी अधिक वर्षो से साहित्य के क्षेत्र में हैं । पिछले 30-35 वर्षों से वे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर व्याख्यान भी दे रहे हैं।

डॉ. नामवर सिंह का परिचय

अध्यापन : अध्यापन कार्य का आरम्भ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से (1953-1959) जोधपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रोफेसर और अध्यक्ष(1970-74 ) आगरा विश्वविद्यालय के क.मु.हिन्दी विद्यापीठ के प्रोफेसर निदेशक (1974) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में भारतीय भाषा केन्द्र के संस्थापक अध्यक्ष तथा हिन्दी प्रोफेसर (1965-92) और अब उसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर इमेरिट्स । महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ।

सम्पादन : “आलोचना” त्रैमासिक के प्रधान सम्पादक।“जनयुग”साप्ताहिक (1965-67) और “आलोचना” का सम्पादन(1967-91) 2000 से पुन: आलोचना का सम्पादन ।1992 से राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान के अध्यक्ष । अब तक साहित्य अकादमी पुरस्कार 1971 ।

सम्मान: हिन्दी अकादमी दिल्ली के “शलाका सम्मान”(1991) उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान के “ साहित्य भूषण सम्मान (1993) से सम्मानित ।

कृतियाँ : 1996 बकलम खुद ,हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग ,पृथ्वीराज रासो की भाषा, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, छायावाद, इतिहास और आलोचना ।

सम्पादित ग्रंथ : कहानी:नई कहानी , कविता के नये प्रतिमान,दूसरी परम्परा की खोज, वाद विवाद सम्वाद, कहना न होगा । चिंतामणि भाग-3 , रामचन्द्र शुक्ल संचयन , हजारीप्रसाद द्विवेदी:संकलित निबन्ध, आज की हिन्दी कहानी, आधुनिक अध्यापन रूसी कवितायें , नवजागरण के अग्रदूत : बालकृष्ण भट्ट ।

कविताएँ:

  • पारदर्शी नील जल में / नामवर सिंह
  • विजन गिरिपथ पर चटखती / नामवर सिंह
  • धुंधुवाता अलाव / नामवर सिंह
  • आज तुम्हारा जन्मदिवस / नामवर सिंह
  • मंह मंह बेल कचेलियाँ / नामवर सिंह
  • पंथ में सांझ / नामवर सिंह
  • कोजागर / नामवर सिंह
  • उनये उनये भादरे / नामवर सिंह
  • बुरा ज़माना, बुरा ज़माना / नामवर सिंह
  • दोस्त, देखते हो जो तुम / नामवर सिंह
  • कभी जब याद आ जाते / नामवर सिंह
  • नभ के नीले सूनेपन में / नामवर सिंह
  • फागुनी शाम / नामवर सिंह
  • दिन बीता, पर नहीं बीतती साँझ / नामवर सिंह
  • हरित फौवारों सरीखे धान / नामवर सिंह
  • पकते गुड़ की गरम गंध से / नामवर सिंह
हिन्दी साहित्य जगत में शोक की लहर

कविता के रचनाकार नामवर सिंह के निधन से हिन्दी साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। साहित्य अकादमी जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ एवं जनसंस्कृति मंच ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वह साहित्य अकादमी के फेलो भी थे। इनके अलावा प्रसिद्ध लेखक अशोक वाजपेयी, निर्मला जैन, विश्वनाथ त्रिपाठी, काशी नाथ सिंह, ज्ञानरंजन, मैनेजर पांडे, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, असगर वज़ाहत, नित्यानंद तिवारी तथा मंगलेश डबराल जैसे लेखकों ने श्री सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और हिन्दी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

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