घर पर तैयार करें नेचुरल कलर्स, होली को बनाएं सेफ

 रंग बरसे, भीगे चुनर वाली बॉलीवुड फिल्म का ये गीत जमकर होली खेलने वालों को मस्ती से भर देता है। पर हर साल की तरह इस बार भी अगर आप सिंथेटिक रंग का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो अब भी समय है संभल जाएं। केमिकल से तैयार ये सिंथेटिक रंग आपको गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। नेचुरापेथिस्ट डॉ. काकोली कहती हैं कि इन केमिकल रंगों के बजाया हर्बल या नेचुरल कलर के साथ ही आप गुलाल का इस्तेमाल करके होली पर न केवल खुद को बल्कि दूसरों को भी सुरक्षा देते हैं। पानी बचाते हैं और पर्यावरण की रक्षा भी करते हैं।

वे कहती हैं कि होली आज का त्योहार नहीं है बल्कि यह प्राचीन समय से मनाया जा रहा है। प्राचीन काल में होली के लिए केमिकल रंग नहीं होते थे। बल्कि लोग घरों में ही फूलों से, फलों से और सब्जियों का इस्तेमाल करके रंग तैयार करते थे। तो क्यों न आप भी इस तरह तैयार किए हुए रंगों का इस्तेमाल कर होली के त्योहार को यादगार पल बना लें।

अगर आप सोच रहे हैं कि ये रंग कैसे बनाने हैं तो आइए हम बताते हैं। परंपरागत तरीका होली के फूलकन्फ्यूज मत होइए, होली के फूल से मतलब है टेसू और पलाश के फूल। ये फूल होली के खूबसूरत रंग बनाने का परंपरागत स्रोत हैं। टेसू के फूलों को पानी में उबालकर रात भर छोड़ देने से प्राकृतिक रंग तैयार हो जाता है।

ये तरीका काफी पुराना है। इन फूलों को सुखाकर इससे गुलाल भी तैयार किया जाता है। जिसका इस्तेमाल पूजन में भी होता है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण भी गोपियों के साथ टेसू के फूल से होली खेलते थे।ऐसे तैयार करें नेचुरल कलर्स लाल रंग : गुलाल के लिए चंदन का पाउडर खूबसूरत लाल रंग का स्रोत है। इसे लाल गुलाल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा के लिए फायदेमंद होता है और आमतौर पर फेस पैक आदि में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा लाल गुलाब के फूलों का इस्तेमाल करके भी लाल रंग या गुलाल बनाया जा सकता है।

गुलाल के लिए इन फूलों को सुखाकर पाउडर बना लें। इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए इसमें आटा मिलाकर गुलाल के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। चंदन का लाल रंग बनाने के लिए दो चम्मच लाल चंदन की लकड़ी का पाउडर पांच लीटर पानी में मिलाकर उबालें और उसमें बीस लीटर पानी मिला लें। लाल अनार के दानों को पानी में उबालकर भी लाल रंग तैयार किया जा सकता है।

नारंगी रंग : केसर की कुछ पत्तियों को दो चम्मच पानी में मसल कर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। इसके बाद पेस्ट को ताजे पानी में मिलाकर इस्तेमाल करें। यह थोड़ा महंगा तो पड़ेगा, लेकिन त्वचा की रंगत के लिए हितकारी होगा। इसके अलावा, एक चम्मच हल्दी पाउडर को दो लीटर पानी में मिलाकर थोड़ी देर उबालें या पचास गेंदे के फूल दो लीटर पानी में मसलकर उबाल लें और रात भर छोड़ दें।

संतरा रंग तैयार हो जाएगा।नीला रंग : नीले रंग का गुलाल तैयार करने के लिए जकरांदा के फूल सुखाकर उनका पाउडर बनाया जा सकता है।हरा रंग : अच्छे हरे शेड के लिए मेहंदी पाउडर (बिना आंवला व रीठा मिलाएं) में बेसन या आटा मिला लें। सूखी मेहंदी चेहरे पर रंग नहीं छोड़ती है और इसे ब्रश से आसानी से झाड़ कर साफ किया जा सकता है।

अगर मेहंदी पाउडर लगाने के बाद चेहरा गीला भी हो जाए, तो भी बहुत हल्का रंग चढ़ेगा और बालों के लिए यह हर्बल कंडिशनर का काम करेगा। गेहूं के पौधे, पुदीना, धनिया व पालक की पत्तियों को सुखाकर पीस लें और हरे गुलाल की तरह इस्तेमाल करें।काला या कत्थई रंग : काले अंगूर के जूस को पानी में मिलाएं या हल्दी पाउडर को थोड़े से बेकिंग सोडा के साथ मिलाकर कत्थई रंग तैयार किया जा सकता है। जामुनी रंग : एक किलोग्राम चुकंदर को कद्दूकस करके एक लीटर पानी में डालकर रात भर छोड़ दें।

इससे गाढ़ा जामुनी रंग तैयार हो जाएगा।अब आप रंग बनाने के लिए बाजार से फल, फूल व सब्जियां लाइए और आज से ही रंग-गुलाल बनाने की तैयारी शुरू कर दीजिए, ताकि होली आपके साथ आपके बच्चों व परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी सुरक्षित रहे।

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