सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी, विधवाओं के पुनर्वास पर अनदेखी बर्दाश्त नहीं 

नई दिल्ली: विधवाओं के पुनर्वास के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब बहुत हो गया, आप की जिम्मेदारी है कि आप इनके लिए कुछ करें। हर कोई अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है। काम न करने का इल्ज़ाम दूसरे पर डालता है, लेकिन काम कोई नहीं करना चाहता। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि कोर्ट अगर कुछ आदेश देता है तो इल्जाम लगता है कि कोर्ट देश चला रहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो सभी राज्य सरकारों से विधवा महिलाओं के पुनर्वास के मामले में जानकारी इकट्ठा करें और एक्शन प्लान तैयार कर कोर्ट को सौंपें।

मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी।कोर्ट ने कहा कि मामले में कोई भी गंभीर नहीं दिख रहा है| ऐसे में राज्य सरकारें कोर्ट को लिख कर दे दें कि वे काम नहीं करना चाहतीं।पिछले 6 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने विधवाओं के आश्रय और पुनर्वास के लिए दिए गए उसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर 12 राज्यों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। जिन राज्यों ने आदेश का पालन किया था लेकिन अधूरी सूचना दी थी उन पर सुप्रीम कोर्ट ने एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। जिन राज्यों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था उनमें उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, मिजोरम, असम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

विधवाओं की हालात सुधारने पर सुझाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय कमिटी बनाई थी। कमेटी में एनजीओ जागोरी की सुनीता धर, गिल्ड फॉर सर्विस की मीरा खन्ना, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंघल जोशी, हेल्प एज इंडिया और सुलभ इंटरनेशनल का एक-एक प्रतिनिधि शामिल हैं।पिछले 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि जिन विधवाओं की उम्र कम है उनके पुनर्विवाह के बारे में योजना बनाए। कोर्ट ने विधवा कल्याण के रोडमैप पर एतराज जताते हुए कहा कि विधवा महिलाओं से बेहतर खाना जेल के कैदियों को मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी कैसे हो सकती है। उनके विधवा होने पर उनका परिवार कैसे छोड़ सकता है।

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