सीबीएसई की पुनर्परीक्षा के खिलाफ याचिका खारिज

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने कक्षा 10वीं और 12वीं के लीक हुए क्रमश: गणित व अर्थशास्त्र के प्रश्न-पत्रों की दोबारा परीक्षा कराने के सीबीएसई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बुधवार को खारिज कर दिया।न्यायमूर्ति एस.ए.बोबडे व न्यायमूर्ति एल.नागेश्वर राव की खंडपीठ ने कहा कि ”सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) फिर से परीक्षा कराने के लिए स्वतंत्र है और अदालत इसमें दखल नहीं देगी।” खंडपीठ ने सीबीएसई के फैसले को चुनौती देने वाले विद्यार्थियों से कहा कि यदि परीक्षा कराई जाती है तो उन्हें उसमें शामिल होना चाहिए।

सीबीएसई ने मंगलवार को हालांकि कहा कि कक्षा 10वीं के गणित विषय की पुनर्परीक्षा नहीं कराई जाएगी, क्योंकि ‘आंतरिक जांच व विश्लेषण’ में पता चला है कि लीक का असर कथित तौर पर कुछ लाभार्थियों तक ही सीमित था।सरकार ने 30 मार्च को घोषणा की थी कि कक्षा 12वीं के अर्थशास्त्र विषय की पुर्नपरीक्षा पूरे देश में 25 अप्रैल को कराई जाएगी, जबकि कक्षा 10वीं के गणित विषय की परीक्षा जरूरत पड़ने पर जुलाई में सिर्फ दिल्ली, एनसीआर व हरियाणा में कराई जाएगी।

याचिका में सीबीएसई के फैसले को चुनौती दिए जाने के अलावा इसमें कथित तौर पर प्रश्न-पत्र लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि प्रश्न-पत्र लीक की कई घटनाएं विभिन्न राज्यों से मिली हैं और दिल्ली पुलिस पूरे देश में इसकी जांच में सक्षम नहीं है।
केरल के विद्यार्थी रोहन मैथ्यू व दो अन्य ने सीबीएसई की कक्षा 10वीं के गणित की परीक्षा के दोबारा कराने के फैसले को रद्द करने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि यह मनमाना, अवैध व संविधान की धारा 14 (कानूनी समानता), धारा 21 (जीवन का अधिकार व स्वतंत्रता) व 21ए (शिक्षा का अधिकार) का उल्लंघन है।

दूसरी याचिका शीर्ष अदालत में रीपक कंसल द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें सीबीएसई के फैसले को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने व दोनों प्रश्न-पत्रों की फिर से परीक्षा कराए जाने की मांग की गई थी।

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